कलम मेरी पहचान वैश्विक साहित्यिक परिवार की काव्यगोष्ठी में बिखरी साहित्य की विविध छटा देश-विदेश के साहित्यकारों ने ऑनलाइन मंच से प्रस्तुत कीं उत्कृष्ट रचनाएं
समस्तीपुर जिला संवाददाता उदय कुमार रिपोर्ट
कलम मेरी पहचान वैश्विक साहित्यिक परिवार (पंजीकृत) के तत्वावधान में बीते रविवार की शाम अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से जुड़े साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर साहित्यप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोजक, संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश राय ने की। मंच संचालन की जिम्मेदारी बैंगलुरू, कर्नाटक की योग शिक्षिका डॉ. अर्चना श्रेया आर्यावर्त ने सुमधुर एवं प्रभावशाली अंदाज में निभाई, जबकि देवघर, झारखंड की युवा कवयित्री श्री ठाकुर ने सह-मंच संचालिका की भूमिका निभाई। कार्यक्रम का शुभारंभ धरा धाम इंटरनेशनल, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के प्रमुख एवं सौहार्द शिरोमणि डॉ. संत सौरभ पाण्डेय (डी.लिट.) द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद डॉ. अर्चना श्रेया आर्यावर्त ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. संत सौरभ पाण्डेय ने साहित्य की महत्ता पर अपना विचार रखते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। साहित्य का वास्तविक उद्देश्य जनहित, समाजहित और राष्ट्रकल्याण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने नवोदित साहित्यकारों से निरंतर लेखन करते रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ऑस्ट्रेलिया से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी लेखक एवं दार्शनिक डॉ. शिशिरेन्दु झा रहे। उन्होंने अंग्रेजी भाषा में गीता के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने तथा दर्शन के क्षेत्र में लेखन के अपने कार्यों की चर्चा की। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कवि अशोक गोयल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। काव्यगोष्ठी के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े साहित्यकारों ने भक्ति, शृंगार, वीर, हास्य-व्यंग्य, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं के साथ गीत, गजल, शेर, शायरी और मुक्तक प्रस्तुत किए। विविध रसों से सजी रचनाओं ने ऑनलाइन मंच को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया और उपस्थित साहित्यप्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया |कार्यक्रम में गाजियाबाद की रजनी सिंह, बड़वानी की शोभा सोनी, महाराजगंज के युवा वीर-रस कवि विनय गुप्ता, मध्यप्रदेश की डॉ. कृष्णा जोशी, छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ कवयित्री डॉ. ममता तिवारी ‘मृदुला’, बेगूसराय की बबिता ठाकुर, महाराष्ट्र के गजलकार मोहम्मद रहीस ‘सनम’, महुआ (वैशाली) के अंतरराष्ट्रीय कवि एवं गजलकार डॉ. प्रीतम कुमार झा, वैशाली के हास्य कवि गौरव कुमार झा, गाजियाबाद के अरुण कुमार अग्रवाल, कानपुर की प्रो. ममता कनौजिया, समस्तीपुर के शृंगार रस के कवि प्रकाश राय तथा बैंगलुरू की डॉ. अर्चना श्रेया आर्यावर्त ने अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को यादगार बनाया |वही उक्त सम्मेलन के समापन अवसर पर कार्यक्रम आयोजक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश राय ने कहा कि ‘कलम मेरी पहचान वैश्विक साहित्यिक परिवार’ वर्ष 2021 से लगातार हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार एवं साहित्यकारों को एक मंच उपलब्ध कराने का कार्य नि:शुल्क कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंच ने वैश्विक स्तर पर अपनी साहित्यिक पहचान बनाई है और भारत के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले साहित्यकार भी इससे जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि मंच पर वरिष्ठ एवं उम्रदराज साहित्यकारों को सम्मान और नवोदित रचनाकारों को सीखने, अपनी प्रतिभा निखारने तथा निरंतर लेखन के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। उन्होंने साहित्यिक गतिविधियों को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने की बात कही। तीन घंटे तक चले इस ऑनलाइन कवि सम्मेलन का समापन साहित्य, संस्कृति और रचनात्मकता को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ किया गया।



