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बारो में रविन्द्र नाथ ठाकुर आर्य ने मृत्यु भोज का बहिष्कार किया , लोगों ने दिया समर्थन जीवित माता-पिता का श्रद्धापूर्वक किया गया सेवा ही श्राद्ध है: आचार्य अरुण प्रकाश आर्य

 बारो में रविन्द्र नाथ ठाकुर आर्य ने मृत्यु  भोज का बहिष्कार किया , लोगों ने दिया समर्थन

जीवित माता-पिता का श्रद्धापूर्वक किया गया सेवा ही श्राद्ध है: आचार्य अरुण प्रकाश आर्य

तेघड़ा से आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट 

वैदिक संस्कृति आधारित आर्य समाज सामाजिक कुरीतियों का विरोध करती है।इसमें श्राद्ध भोज लोगों के मानसिकता में बसा हुआ है।आर्य समाज शाखा बारो की ओर से श्राद्ध भोज के बहिष्कार की शुरुआत की गई।आर्य समाज बारो के प्रधान रविन्द्र ठाकुर आर्य अपनी स्मृतिशेष धर्मपत्नी सरोज देवी के निधन उपरांत वैदिक शांति यज्ञ किया।मुख्य यजमान पद को सुशांत आर्य, रणवीर आर्य,निशांत आर्य सुशोभित किया।इस मौके पर बड़ी संख्या में आर्यजन समेत बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। प्रधान रविन्द्र आर्य ने श्राद्ध भोज का त्याग कर श्रद्धा से समाज के लिए बर्तन सेट दान किया।लोगों ने इस बदलाव की शुरुआत की खूब सराहना किया। मौके पर वरिष्ठ पत्रकार राम जीवन सिंह उर्फ महंत दास ने कहा कि श्रद्धा से किया गया कार्य ही श्राद्ध है। माता पिता की जीवित अवस्था में ही सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है।बाद में किया हुआ कार्य केवल मन का भ्रम है।बड़ी संख्या में लोगों ने इस कार्यं का समर्थन किया। आचार्य अरुण प्रकाश आर्य ने कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में यह देखकर आश्चर्य होता है कि लोग मध्यकालीन इस मिथ्या परम्परा को बिना सोचे विचारे मानते व पालन करते आ रहे हें। महर्षि दयानन्द ने मृतक श्राद्ध के विरुद्ध अनेक शास्त्रीय विधान भी दिये थे जिससे यह सिद्ध होता था कि श्राद्ध मृत पितरों का नहीं अपितु जीवित माता-पिता, दादी-दादा व अन्य वृद्धों का किया जाना चाहिये। मृतक का तो दाह संस्कार कर देने से उसका शरीर नष्ट हो जाता है। उस मृतक का उसके कुछ समय बाद ही पुनर्जन्म हो जाता है। वह अपने कर्मानुसार मनुष्य या पशु-पक्षी आदि अनेक योनियों में से किसी एक में जन्म ले लेता है। यही क्रम चलता रहता है। धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से किसी के भी द्वारा अपने मृत पितरों का श्राद्ध करना अनुचित व अवैदिक कार्य होने से अधार्मिक कृत्य ही है जिसका कोई तर्क, युक्ति व वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह असत्य व अविवेकपूर्ण है।यह अन्धविश्वास से युक्त कृत्य है। मौके पर आर्य समाज की जिला प्रधान शिवजी आर्य, दीनदयाल यादव, शिक्षक शैलेंद्र कुमार, राजेश कुमार ,विष्णु आर्य ,डॉक्टर सुधीर पासवान, रंजीत कुमार, शिक्षक नेता सुरेश राय,वैदिक अचार्य अरुण प्रकाश आर्य, अचार्य भूपेंद्र आर्य ,आचार्य अशोक प्रसाद आर्य, वार्ड पार्षद अशोक ठाकुर, कृष्णनंदन सिंह ,सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित थे।

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