जहां पूर्व से ही कुएं में भांग गोला गया हो, वहां विकास नहीं* विनाश से ही होगा?
बरौनी नगर परिषद क्षेत्र में कुछ ऐसे लोगों का जमावड़ा हो गया है जो कोई योजना में लूट बताते हैं कोई सरकारी जमीन पर कब्जा करते हैं तो कोई व्यवसाय में लूट मचाते हैं।
बरौनी नगर परिषद वार्ड संख्या 23 में हो रहे सड़क निर्माण कार्य का ग्रामीणों ने रुकवाया सरकारी योजना का कार्यनगर विकास एवं आवास योजना के तहत मुख्य सड़क से योगेंद्र यादव के घर की ओर जाने वाली सड़क में मिट्टी और आईटी सॉलिग के कार्य में घोर अनियमिता के कारण स्थानीय लोगों ने बवाल काटते हुए कार्य को रुकवा दिया।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास।
बरौनी नगर परिषद क्षेत्र में योजनाओं से हो रहे कार्य को लेकर विवाद होता ही रहा है। कभी सूचना अधिकार से लूट का खेल उजागर होता है। तो कभी आम जनता द्वारा विरोध करने के कारण।
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा बरौनी नगर परिषद के मुखप्रसाद संजीव
कुमार उप मुख्य परिषद नेहा कुमारी एवं वार्ड पार्षद किरण देवी द्वारा वार्ड संख्या 23 से बारो मेंन रोड से बाबा बालकपुरी ओम प्रकाश गुप्ता के घर से होते हुए योगेंद्र यादव के घर के और मिट्टी ईट सोलिंग एवं पीसीसी। सड़क निर्माण के कार्य में प्रथम चरण में ही हो रहे कार्य को अनियमित देखकर स्थानीय लोगों ने बवाल काटते हुए कार्य को रुकवा दिया। यूं तो बरौनी नगर परिषद क्षेत्र के निर्माण के उपरांत सरकारी योजनाओं के कार्य में बवाल होना चर्चा में ही रहता रहा है। बताया जाता है कि परिषद क्षेत्र के किसी भी कार्य के योजना में कुछ ऐसे लोगों का जमावड़ा है, जो कार्य को सही रूप से करने- कराने के बजाय पहले सब मिलकर अपना_ अपना कमीशन सेट कर लेते हैं, और तब फिर कार्य को प्रारंभ किया जाता है। क्योंकि इस ग्गिरोह में ऐसे ऐसे दबंग लोगों का गुट है जो अपने निजी स्वार्थ को लेकर परिषद के अधिकारी एवं मुख्य पार्षद, उपमुख्य पार्षद को भी अपने कब्जे में लेकर कार्य करवाने का फार्मूला तैयार कर लेते है। बताया यह भी जाता है कि ऐसे ही लोगों ने मुख्य पार्षद को चुनाव जीताने के लिए दिन रात एक कर दिया था। तो अब तो उन्हें इसका फायदा चाहिए ही चाहिए? उनका कहना है कि सभी मिलजुल कर राजनीतिक की खिचड़ी पकाएंगे, और मिल बैठकर सभी एक साथ खाएंगे। जिसने वोट दिया है वो तो अच्छे कार्य के लिए ललचाते ही रहेंगे । उनमे एसी हिम्मत कहां जो हम सबों का विरोध कर सके। और अगर विरोध करेंगे तो उन्हें रंगदारी मांगने के नाम पर झूठा मुकदमा कर केस में फंसा देंगे।
सूत्रों के अगर मने तो छोटी मुंह बड़ी बात कौन करेगा? क्योंकि अधिकारियों में भी हमारा ही पैट है् ही। उन्हें जैसा कहेंगे, वैसा ही वह भी करेंगे। ऐसे लोगों में ऐसा गठबंधन है कि परिषद के अंदर एक कहते हैं कि खिचड़ी बनाओ,तो दूसरा कहते हैं कि पारस भी ले लो,तो तीसरा कहते हैं की चम्मचों को भी देना है,और फिर चौथा कहते हैं कि अगर इसमें थोड़ा सा चोखा हो जाता है तो मजा आ जाता।
लेकिन टुकुर टुकुर देख रही बेबस जनता कहती है कि सरकारी धन का लूट है लूट सको सो लूट लो , नहीं तो अंतकाल पछताएगा जब पद प्रतिष्ठा जाएगी छूट। जबकि सरकार ने परिषद के 31 वार्डो में कोई भूखा नहीं रहे इसकी चिंता में जुटी रहती है।
इस कार्य की योजना का कुल राशि 9 लाख 25 000₹200सौ बताई जाती है। जिस तरह से इट सोलिंग लगाने कार्य कराया जा रहा था। क्या सरकारी योजना में इसी तरह से सोलिंग कराया जाना था? कार्य कर रहे संवेदक से अच्छे-अच्छे
बड़े-बड़े मुख दर्शन ठेकेदार हैं, जिनके दर्शन से जनता का भागय बदल जा रहा है, जो अपने द्वारा कराए गए सड़कों वह कार्यों के लगभग 20 बरस चलने की बातें बताते हैं। चाहे वह निर्माण कार्य 2 वर्षो में ही खत्म क्यों नहीं हो जाए। धन्य है सरकारी कार्य को अंजाम देने वाले अधिकारी और ठेकेदारों की गोष्टी?
इतना ही नहीं? अभी बरौनी नगर परिषद क्षेत्र में न्यायालय के आदेश पर एनक्रोचमेंट हटाने का कार्य करने को लेकर मापी चल रही है, मापी होने पर कई सफेद पोषों द्वारा सरकारी जमीन को एनक्रोचमेंट कर महल खड़ा कर लेने का मामला भी सामने आ रहा है। और तब वह कहते फिरते हैं की सरकार के वोट यहे खातिर देलिय रअ कि सरकार बनाने के बाद हमारा बना बनाया मकान ही तोड़ डाले? जबकि यह नहीं कहता की पाप छुपता नहीं? जो जैसा कर्म करता है, वैसा एक दिन भोगना ही पड़ता है। बताया जाता है कि सरकारी जमीन को अपने कब्जे में लेने वाले लोगों द्वारा सरकार के नाम पर अभद्र भाषा का भी प्रयोग किरने में भी आगे रहने की बातें बताई जाती है। दबंगई करके लूटो और पर्दाफाश होने पर सरकार को ही गालियां दो ।हां एक बात तो है ऐसे माहौल में मध्यम वर्गीय लोग ही दोनों तरफ से पीसे जाते है। अगर छोटे-मोटे दुकान खोलकर अपना रोजी-रोटी चलते हैं लेकिन फिर भी उन्हें ऐसे दबंगो को मासिक किराया देना ही पड़ता है। लेकिन कानून का डंडा चलने पर सबसे पहले वैसे ही लोग शिकार होते हैं। किराया वसूल करने वाले सामने नहीं आते। जो मन में आबो उ कैने जा ओर दबंग के माल बनैने जा। इसीलिए कहते हैं कि बरौनी नगर परिषद क्षेत्र के कुआं में ही भांग घोल दिया गया है। जहां गलत कार्य करने वाले मालामाल होते हैं, और मध्यम बरगी रोने को मजबूर होते हैं?



