**स्वास्थ्य को लेकर पीएमसीएच पटना में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं भाजपा नेता राम लखन सिंह।**
**कमल फूल को सीचकर बट वृक्ष का आकार देने वाले आज जीवन की लड़ाई लड़ रहे हैं।**
**बेगूसराय जिले में भाजपा को मजबूत दिशा देने वाले पूर्व प्रदेश मंत्री एवं बेगूसराय जिला के जिला अध्यक्ष राम लखन सिंह की स्वास्थ्य की स्थिति नाजुक बताई जाती है।**
बरौनी/बेगूसराय/ संवाददाता महंत रामजीवन दास
एक समय था जब दो धुरी जिले में अपनी राजनीतिक गरिमा स्थापित करने के लिए एक दूसरे पर वार- प्रति बार मैं जुटे हुए थे,। जबकि एक पक्ष का कहना था की, बछवारा से बखरी लाले- लाल और दूसरा पक्ष अपना दबदबा किसी भी स्थिति में कायम करना चाहता था, जिसको लेकर हजारों लोग काल के गाल में भी समा गए। इस क्रम में संघ परिवार से जुड़े राजनीतिक संगठन के कार्यकर्ता भैंय से अपना कार्य करने में असमर्थ थे। इसी बीच बिहट का लाल एवं संघ के फाइटर कार्यकर्ता राम लखन सिंह भारतीय जनता पार्टी बेगूसराय जिला के अध्यक्ष के रूप में पदारपन हुआ। जिनकी नीतिगत मार्गदर्शन से कमल फूल के वृक्ष को सीचने का कार्य प्रारंभ हुआ। जिनके अथक परिश्रम से राजनीतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी का संगठन मजबूत होने लगी। भयभीत रहने वाला कार्यकर्ता के मुख में आवाज मिली। जिनके मार्गदर्शन में कमल का वृक्ष बट वृक्ष का रूप धारण किया। जबकि विरोधी पक्ष उन पर कई तरह के हमले किए। जिसका बचाव वह अपने नीति के तहत करते रहे। राजनीतिक स्तर पर उन पर कई मामले भी दर्ज कराए गए। जिसका सामना भी उन्होंने किया। आखिर एक राजनीतिक साजिश के तहत प्रशासन को मिलाकर उन्हें गिरफ्तार करबाया गया। जिस मामले में दशकों बाद न्यायालय द्वारा उन्हें सजा सुनाई गई। जबकि वह गहरी बीमारी से ग्रसित होकर इलाजरत थे और है। जिस कारण उनके परिजन एवं समर्थक न्यायालय से बेल एवं इलाज के लिए प्रयासरत है। संगठन का विस्तार होने पर कुछ स्वार्थी तरह के नेता उनके विरोधी भी माने जाते हैं। जिनकी आदत रही है की कमाय धोती वाला,आ खाय टोपी वाला।
भारतीय जनता पार्टी के सच्चे हितैषी एवं जनता और कार्यकर्ता का हमदर्द आज हाथ में हथकड़ी पहने पटना के पीएमसीएच अस्पताल में चिंताजनक स्थिति में इलाज रत बताए जाते हैं।
उनके द्वारा सीचे गए भारतीय जनता पार्टी आज बेगूसराय जिले में बट वृक्ष की तरह विशाल रूप ले रखा है। अब तो विरोधी संगठन के लोग भी भारतीय जनता पार्टी के नाम की माला जपने को मजबूर दिखती है। और अपना मुख्य विरोधी मानती है। लेकिन भाजपा संगठन को गति देने वाला शेर आज अस्पताल में स्वास्थ्य को लेकर जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे है। बताया जाता है कि पार्टी ने उन्हें कई बार चुनावी मैदान में भी उतारा लेकिन सफलता नहीं पा सके। लगभग 88 हजार मत प्राप्त कर जीत पाने में असफल रहे, जबकि लगभग 38हजार मत पाकर पार्टी के एक उम्मीदवार ललन कुंवर ने मास्को रूपी संगठन को तेघरा विधानसभा मे हराकर जीत हासिल करने में सफलता प्राप्त की थी। जबकि संघ परिवार से वह कभी भी जुड़े नहीं थे। ना ही उसके नीति से अवगत थे।







