अभेदानंद आश्रम बारो में निर्वाण दिवस पर याद किए गए स्वराज के प्रथम मंत्र दृष्टा एवं सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महर्षि दयानंद सरस्वती।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास की रिपोर्ट
आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती का 142वाँ निर्वाण दिवस अभेदानंद आश्रम बारो में मनाया गया।इस मौके पर आयोजित देवयज्ञ में आचार्य राघवेंद्र आर्य ने कहा कि सन्यासी दयानंद ने दिवाली के दिन ही अपने शरीर का त्याग किया था।उन्हें अपने खास कर्मी ने जहर दे दिया था।उन्हें पता चल गया था, फिर भी वे मना नहीं किए थे। शरीर त्याग करते हुए कहा था कि, ईश्वर तेरी इच्छा पूर्ण हो। उनकी प्रेरणा से अमर शहीद भगत सिंह के दादाजी,चंद्रशेखर आजाद सहित सैकड़ों आर्यसमाजियों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी बलिदानी दी।मौके पर आचार्य अरुण प्रकाश आर्य,आचार्य भूपेंद्र आर्य,आचार्य गोविंद आर्य,प्रधान रविन्द्र आर्य,सुधीर आर्य,संतोष आर्य,रजनीश आर्य आदि ने भी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास करने वाले महर्षि दयानंद के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए स्वामी जी को श्रद्धांजलि आहुति दी।इस मौके पर बड़ी संख्या में आर्यसमाजी मौजूद हुए।


