दिनकर की प्रारंभिक पाठशाला बारो मध्य विद्यालय को उत्क्रमित करने की मांग को लेकर चुनाव पूर्व शरीर त्याग तक अनशन सत्याग्रह करने का निर्णय लिया।
बरौनी/बेगूसराय/संवाददाता । रिटायर्ड शिक्षक का विकास के प्रति जुनून देखकर क्षेत्र के युवा वर्ग भी आगे आने लगे हैं।
समाजसेवा संघर्ष समिति, गढ़हारा के अध्यक्ष मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा ने आगामी विधान सभा चुनाव के पांच दिन पूर्व बरौनी प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय बारों के द्वार पर 96घंटे का अन्न त्याग आंदोलन के साथ शरीर त्याग तक अनशन करने की लिखित चेतावनी सरकार को दे दी है। इससे माहौल काफी बदला हुआ दिख रहा है। गढ़हारा परिक्षेत्र के 15 वर्ग किलोमीटर में निवास करने वाले दो पंचायतों गढ़हारा एक और गढ़हारा में करीब दो लाख कीआबादी है। जिसको लेकर समाजसेवी मो सरफराज,अमित ठाकुर,रामानंद सागर कहते हैं कि यहां के चार मध्य विद्यालयों से अष्टम उत्तीर्ण होने के बाद छात्र- छात्राएं नवम में नामांकन करवाने के लिए बरौनी प्रखंड के बच्चे अन्य प्रखंड तेघरा क्षेत्र में करीब 5किलोमीटर दूरी तय कर नामांकन करवाते हैं।बीते दो वर्षों से शिक्षा विभाग का पत्र जारी होने के बाद भी यहां के बच्चों को विशेष रूप से नामांकन हो पाता है।बच्चों को लगता है कि उनके क्षेत्र में विद्यालय नहीं होने पर बहुत परेशानीयया है। इसलिए वे खुद को सरकारी व्यवस्था में अपने को उपेक्षित समझते हैं।बच्चे खुद को शरणार्थी महसूस करते हैं।उन्हें लगता है कि वे किसी के कृपा से पढ़ाई कर पा रहे हैं। समाजसेवी सचिन मेहता,कन्हैया कुमार,गोविंद आर्य ने कहा कि सरकार की घोषणा के बाबजूद वर्तमान समय पूर्णतः अनुचित है। उत्क्रमण नियम के विरुद्ध गढ़हारा के साथ खुला अन्याय हो रहा है। समाज सेवा संघर्ष समिति, गढ़हारा के अध्यक्ष मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा ने इसे चुनौती मानते हुए दो विकल्प लिया है।श्री वर्मा ने कहा कि उच्च विद्यालय प्राप्ति तक तत्काल प्रभाव से बिहार सरकार को मताधिकार वापस करता हूं, या फिर उच्च विद्यालय नहीं उपलब्ध होने पर आगामी विधानसभा चुनाव से 5 दिन पूर्व 96 घंटे का अन्न त्याग के उपरांत शरीर त्याग सत्याग्रह हेतु आमरण अनशन करने का निर्णय लिया है।उन्होंने बताया कि इसकी विधिवत निबंधित सूचना डीएम,सीएम व पीएम को भी दी गई है। स्काउट से राष्ट्रपति सम्मानित सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि बिहार राज्य सरकार ने मुचकुंद दुबे समिति बनाई। समिति ने जून 2007 को शिक्षा का सर्वव्यापीकरण करने का सुझाव दिया। राज्य सरकार ने निर्णय लिया कि बच्चों को उनके गृह क्षेत्र में ही उच्च विद्यालय शिक्षा दूंगा। इसी उद्देश्य से राज्य के सभी पंचायत को उच्च विद्यालय से आच्छादित करने का संकल्प लिया। निर्णय लिया कि हर पंचायत के एक मध्य विद्यालय को अनिवार्य रूप से उत्क्रमित कर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किया जाएगा।बताया कि जिला के शिक्षा विभाग की अज्ञानता भूल अथवा द्वेषवश गढ़हारा का दोनों पंचायत वंचित रह गया।सन 2010 के बाद यह नगर परिषद बीहट अंतर्गत हो गया। नियमानुसार दो विद्यालय का उत्क्रमण होना था।समाजसेवी राकेश सिन्हा,विष्णु कुमार,सुधीर राय बताते हैं कि स्थानीय बच्चों को गुलामी काल ही महसूस हो रहा है।हर वर्ष करीब पांच सौ बच्चे नवम में नामांकन के लिए अन्य प्रखंडों में भटकते हैं।कई बार दूसरे क्षेत्र के बच्चे का नामांकन नहीं लेने की बात कह लौटा दिया जाता है। गढ़हारा में उच्च विद्यालय नहीं होने की स्थिति में शिक्षा विभाग विशेष पत्र निकाल कर ऐसे पीड़ित बच्चों का नामांकन लेने का आदेश जारी करती है।यह सिलसिला कई वर्षों से जारी है। गढ़हारा के बच्चे खुद को शरणार्थी महसूस करते हैं।उन्हें लगता है कि विशेष कृपा पर उनका पठन- पाठन हो रहा है।इस स्थिति में बालिकाएं अपने घर से दूर के विद्यालय में नामांकन लेने से कतराती है।वे अपने को असुरक्षित महसूस करती है। इस कारण बहुत लड़कियां पढ़ाई छोड़ने को भी विवश हो जाती है। बच्चे जो देश के भविष्य हैं, उनका शिक्षा पाने का संवैधानिक अधिकार को प्रदान करवाने में विभाग अक्षम है। बेगूसराय जिला का प्राचीन विद्यालयों में से एक राजकीय कृत मध्य विद्यालय, बारो भी है।वरिष्ठ साहित्यकार कुमार विनिताभ ,पूर्व सरपंच रंजन चौधरी ने कहा कि इस विद्यालय की स्थापना 1875 ईस्वी में हुई।अभी यह 150 वर्ष पूरा किया है।यह विद्यालय गुलामी काल से ही ज्ञान का प्रकाश फैलाता आ रहा है।यहां पढ़ने वाले राष्ट्रकवि, सिंचाई मंत्री, उच्च न्यायालय केन्यायाधीश ,समाज सुधारक,विद्वान समेत कई बड़े-बड़े पदों को सुशोभित किया है। इस प्रकार राष्ट्रीय,राज्य स्तरीय एवं क्षेत्रीय विभूतियों का श्रृंखला है। लेकिन इस विद्यालय को सरकार आज तक उच्च स्तर का दर्जा देकर सुशोभित नहीं कर पाई है। जब कि यह करीब 35 कमरे की बिल्डिंग,मुख्य द्वार से जुड़ा भव्य चारदीवारी,एक बड़ा मैदान समेत सभी आधारभूत संरचनाओ से पूर्ण है।गढ़हारा - बारो मुख्य सड़क से जुड़ा यह विद्यालय कई स्मृतियों को संजोए हुए है।स्थानीय लोग राष्ट्रकवि दिनकर की प्रारंभिक इस विद्यालय को एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने, दिनकर के कमरे को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की भी मांग सरकार से लगातार कर रहे हैं।



