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Sach Aaj Tak News बेगूसराय को वर्षों से है एक दर्जन जोड़ी ट्रेनों के ठहराव का इंतजार बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय आज भी रेल सुविधाओं से है वंचित

 बेगूसराय को वर्षों से है एक दर्जन जोड़ी ट्रेनों के ठहराव का इंतजार बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय आज भी रेल सुविधाओं से है वंचित


बेगूसराय संवाददाता राम आधार साहनी

 किशनगंज स्टेशन को हाल ही में एक साथ 11 जोड़ी महत्वपूर्ण ट्रेनों का स्टॉपज मिला है। यह निश्चित रूप से किशनगंज जैसे छोटे जिले और उसके मुख्यालय शहर के लिये सबसे बड़ी उपलब्धि है। लेकिन बिहार की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाला बेगूसराय का रेलवे स्टेशन अब भी पूरी तरह से उपेक्षित है। यहां दर्जन भर लंबी दूरी की महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनें, प्रतिदिन बेगूसराय के लाखों लोगों को मूंह यो चिढ़ाते हुये आगे से गुजर जा रही है। बेगूसराय पटना के बाद राज्य में सर्वाधिक कर अदा करने वाला जिला है और वाणिज्य-व्यापार का प्रमुख केंद्र है। इसके बावजूद यहां 12 जोड़ी लंबी दूरी की महत्वपूर्ण ट्रेनें नहीं रुकती है। साथ ही कोलकाता सहित कई महानगरों व महत्वपूर्ण शहरों के लिये कोई सीधी और द्रुतगामी रेल सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। जबकि सोनपुर मंडल की आय में बेगूसराय तीसरे स्थान पर है। लगातार बेगूसराय जिला उपेक्षित राजीव कुमार पूमरे दैनिक रेल यात्री संघ, बेगूसराय के संस्थापक सह महासचिव राजीव कुमार ने कहा कि बेगूसराय स्टेशन और जिले के साथ लगातार उपेक्षा और साजिश होती रही है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर क्यों जन शताब्दी, हाटे-बाजारे, मोकामा डीएमयू, पटना डीएमयू और जानकी जैसी कई ट्रेनें बेगूसराय से छीन ली गई? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा : भागलपुर से दिल्ली (1204 किमी), मात्र 16 घंटे 35 मिनट में कटिहार से दिल्ली (1280 किमी), मात्र 18 घंटे में पर बेगूसराय से दिल्ली मात्र (1108 किमी) की दूरी 19 से 20 घंटे में। आखिर क्यों हो रहा है ऐसा भेदभाव ? जनप्रतिनिधियों और विपक्ष से सवाल श्री कुमार ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस मसले पर तुरंत सकारात्मक पहल करें। उन्होंने कहा कि यदि किशनगंज की तरह बेगूसराय को न्याय नहीं मिला, तो आम जनता विवश होकर मोकामा, बरौनी या हाथीदह जाकर ट्रेन पकड़ने को मजबूर होती रहेगी, जिससे समय, धन और सम्मान तीनों की हानि होती रहेगी और जान का भी खतरा हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि स्थिति जस की तस रही, तो संभव है कि आम जनता अपने जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने में देर नहीं करेगी साथ ही उन्होंने यह कहा कि आम लोगों के जीवन से जुड़े इस महत्वपूर्ण मसले पर विपक्ष की चुप्पी भी सवालों के







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