दो दिनों में मालती गांव में कई पशुपालकों एवं ग्रामीणों को काटकर किया जख्मी पागल कुत्ते के आतंक से दहशत में लोग।
बरौनी बेगूसराय सच आज तक न्यूज संवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट
एक पागल कुत्ते ने काटकर दो दिनों मे मालती गांव के अलग अलग टोला में तकरीबन आधे दर्जन से अधिक पशुपालकों एवं ग्रामीणों को घायल कर दिया है। इसके बाद गांव में पागल कुत्ते को लेकर आतंक का माहौल है। ऐसे में गांव की अधिकांश महिलाएं, वृद्ध व बच्चे दो दिनों से घर के अंदर ही दुबके रहने को मजबूर हो गए हैं। पागल कुत्ते के भय का आलम यह है कि एक ओर गांव के पशुपालक अपने पशुओं को बचाने के लिए रतजगा करने को मजबूर हैं। तो वहीं दूसरी ओर दिन में युवा लाठी डंडा के साथ टोली में घर से बाहर निकल रहे हैं। मालती गांव निवासी अनिल पोद्दार ने बताया कि कहीं बरौनी के मालती गांव में कुत्ते के डर से लाठी लेकर ग्रुप में निकलते लोग अन्यत्र से एकाएक गांव में आया काले रंग का यह कुत्ता गांव के रविंद्र राय के पुत्र गोपाल राय, जयकांत पाठक के पुत्र फुलेना पाठक, एवं ओमप्रकाश जी की माता जी सहित आगे दर्जन लोगों को काटकर घायल कर चुका है। योगेंद्र पोद्दार ने बताया कि शायद पागल हो चुका उक्त काले रंग के कुत्ते ने मालती गांव निवासी लातूर के गाय के अलावा खेत में चर रहे कई बकरियों को अपना शिकार बनाया है। मालती गांव निवासी जाने-माने शिक्षक सह अधिवक्ता नागेश्वर पाठक ने बताया कि बीते दो दिनों से गांव में पागल कुत्ता का आतंक है। उन्होंने बताया कि शनिवार की दोपहर जब वह अपने दरवाजे पर कुछ छात्र-छात्राओं को पढ़ रहे थे। किसी बीच घर के पीछे की ओर से उक्त पागल काले कुत्ते ने उनके आंगन में प्रवेश कर परिवार के लोगों पर एकाएक अटैक कर दिया। इस दौरान लोगों के सामूहिक प्रयास से कुत्ते को तो भगाया गया। लेकिन एकाएक परिवार के लोगों में हुई भगदड़ के दौरान लोगों को चोट आई है। घटना के बाद उक्त पागल कुत्ते के भय से न सिर्फ किसानों ने अपने खेत में जाकर खेती से परहेज करना शुरू कर दिया है। वहीं प्रतिदिन खेतों मे पशु चराने वाले पशुपालक भी दो दिनों से अपने पशुओं को लेकर अन्यत्र जाना छोड़ दिया। राखी देवी ने कहा कि कुत्ता के भय से उन्होंने शनिवार को अपने बच्चों को स्कूल भेजना भी मुनासिब नहीं समझा है। लोग बताते हैं कि न सिर्फ सुरक्षा के दृष्टिकोण से बल्कि उक्त कुत्ता को घेर कर मारने के ख्याल से भी मोहल्ले के युवा लाठी डंडे लेकर समूह में ही सड़कों पर निकलने लगे हैं। जबकि रातों में दरवाजे पर बंधे पशुओं की रक्षा के लिए पशुपालकों को रात भर जागकर समय समय गुजारने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसकी सूचना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी गई है। ताकि उनके माध्यम ध्यम से प्रशासनिक स्तर पर उक्त कुत्ते को पकड़ने या मारने की व्यवस्था की जाए। लेकिन फिलहाल इस मामले में कोई




