सिंभावली उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपराधी की लाश मंगलवार को बेगूसराय पहुंचते ही सैकरो लोगों की भीड़ जमा हो गई।
समर्थकों द्वारा डब्लू यादव अमर रहे, पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगने लगे
समर्थकों के अनुसार चुकी वह यादव था और राजद समर्थक था, इसीलिए उसका एनकाउंटर हुआ।
हम नेता राकेश हत्याकांड में जेल बंद अपराधी की पत्नी सीता देवी जेल गेट पर एंबुलेंस पहुंचने ही उसे दर्शन कराया गया।
पत्नी सीता देवी ने एंबुलेंस में अपने पति की लाश को देखते हुए हाथों की चूड़ी एवं मांग का सिंदूर मिटाया।
जब लाश लेकर एम्बुलेंस सबदलपुर गांव पहुंची तो उसकी चारों बेटी और मां सहित परिवार के अन्य लोग दहाड़ मार कर रोने लगे।
बरौनी/बेगूसराय/संवाददाता सच आज तक न्यूज़ महंत राम जीवन दास
रंगदारी, हत्या, हत्या का प्रयास जैसे लगभग दो दर्जन संगीन मामलों के आरोपी₹50000 का इनामी सबदलपुर निवासी डब्लू यादव को उत्तर प्रदेश मैं पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद बेगूसराय जिले में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई है। उनके समर्थक डब्लू यादव अमर रहे, पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। जिसको लेकर पुलिस कप्तान बेगूसराय ने जगह-जगह सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था कर रखी थी। साहेबपुर कमल थाना क्षेत्र के अपराधी के गांव तक चपपे चपपे पर पुलिस तैनात कर रखी थी।
पुलिस कप्तान मनीष कुमार के अनुसार हम नेता राकेश कुमार की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी डब्लू यादव की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी कर रही थी । यहां तक की उसकी सूचना देने वालों के लिए₹50000 का इनाम भी घोषित कर दिया गया था। एवं 18 जुलाई को बिहार पुलिस की ओर से डब्लू यादव को भगोड़ा भी घोषित कर दिया गया था।
इसके बाद बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स एसटीएफ की विशेष टीम और बेगूसराय दीव की टीम उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी कर रही थी। लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी, डब्लू यादव पर हत्या, रंगदारी, हत्या कर देने का प्रयास सहित जमीन कब्जा करने का भी आरोप था। उक्त सातिर अपराधी परं दियरा क्षेत्र के बालू घाट से लेकर कुरहा बाजार के फोर लेन तक उसके भय से लोग जुबान नहीं खोल पाते थे।
अपराधी यादव 2018-19 मैं राजनीतिक बैच बनाने की कोशिश करने लगा और बिहार के चर्चित संगठन राजद के करीब आने प्रयास करने लगा था। राजनीतिक धमक दिखाकर 2021 में अपनी पत्नी सीता देवी को सरपंच का चुनाव लगाकर उसे जीत दिलवाया। आखिर किसकी मजाल जो उसके नाम पर वोट नहीं देता। एक फौजी को उसके बेटे के सामने ही फौजी को गोली मार कर हत्या कर दी। 2017 में ज्ञान टोल के रहने वाले फौजी महेंद्र यादव की कुरहा बाजार से लौटने के दौरान बेटे के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। जबकि उस समय अपराधी यादव जेल के सलाखों के अंदर बंद था। लेकिन किसी मामले में उसके खिलाफ गवाही देने के कारण आक्रोशित यादव ने अपने गुरुगो से उसकी हत्या करवा दी। जिसमे भी वह नामजद था। 2014 में डब्लू यादव ने सलेमपुर निवासी योगेंद्र यादव से रंगदारी की मांग की थी और नहीं देने पर उसे गोली मारकर हत्या कर देने का असफल प्रयास किया। नवंबर 2015 में ज्ञान टोल के रहने वाले चिमनी भट्ठा के मलिक रूपेश कुमार से हथियार के बल पर₹200000 की रंगदारी मांगी थी। और नहीं देने पर जॉन से मार देने की धमकी दी थी। जबकि हम नेता राकेश कुमार उर्फ विकास की अपहरण के एक दिन बाद ही गंगा किनारे बालू घाट पर गड्ढे में दफना दिया और वह एनसी आर चला गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार वहां भी डब्लू यादव अपना गैंग बना रहा था। हापुर, नोएडा, गुड़गांव के आसपास भी एक्टिव होने लगा था, जिसका इनपुट यूपी एसटीएफ को पहले से मिल रही थी तो वह उसकी खोजबीन में जुटी हुई थी। उसका नेटवर्क खंगाला जा रहा था। इसी द्रव्यमान बिहार से भी एसटीएफ और बेगूसराय डीआईयू की टीम सूचना पर वहां पहुंच गई, तो फिर खोजबीन करने में आसानी हुई।
दो दर्जन रंगीन मामले का आरोपी एवं ₹50000 का इनामी अपराधी कुख्यात डब्लू यादव को उत्तर प्रदेश बिहार एसटीएफ एवं बेगूसराय सहित स्थानीय प्रशासन द्वारा मोटरसाइकिल से भाग रहे डब्लू को रुकने का इशारा किया, लेकिन अपराधी यादव ने पुलिस पर फायरिंग करते हुए भाग निकलने की भरपूर कोशिश की। पुलिस ने अपने आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई करने पर यादव को गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जिसके पास से हथियारओ गोलियों का जखीरा बरामद किया गया, जिस मोटरसाइकिल से वह भाग रहा था, जांच करने पर वह भी चोरी का मोटरसाइकिल साबित हुआ।
बताया जाता है कि हमं नेता हत्याकांड में जेल में बंद उसकी सरपंच पत्नी सीता देवी को पति की मृत्यु के उपरांत न्यायालय ने पैरोल नहीं दिया,। क्योंकि उक्त कांड में पहले से ही जमानत के ल अर्जी लगाई गई है। जिस पर सात अगस्त को सनवाई होने की बात बताई जाती है।
बताया जाता है कि सरपंच ने रात में खाना भी नहीं खाया और गुमसुम होकर बैठी रही। पति की मृत्यु उपरांत वह सदमे में बताई जाती है।
सबदलपुर पंचायत के उनके समर्थकों के अनुसार डब्लू यादव जाति का था, जिस कारण पुलिस ने उसका एनकाउंटर किया। अगर किसी यादव की हत्या होती है तो उसके आरोपियों को पुलिस एनकाउंटर क्यों नहीं करती? अपराधी की मां रोते हुए कह रही थी की हत्याकांड में जब पुलिस ने मेरे घर को तोड़ा, पुतोहूं को जेल के सलाखों में बंद कर रखा है। घर का कुर्की जपती को करके सारा सामान उठा कर ले गए, फिर हमारे बेटे को भी एनकाउंटर कर दिया गया। मां का कहना है आव हमरा चार गो पोती आरो एगो पोता क के देखते हो? मां की चिकार के बीच चारों बेटियां भी बदहवास होकर रोने लगती है। कहती है कि इनकाउंटर करके पुलिस ने पूरे परिवार के लोगों को आखिर क्यों सजा दी? जबकि हत्या करने का गुनाह हमर बेटा डब्लू यादव ने किया तो उसे पड़कर जेल में डाल दिया जाता। लेकिन उसका तो इनकाउंटर करके उसकी सजा उसके बाल -बच्चे सहित पूरे परिवार को दी गई।
यादव के परिजनों के आक्रोश को देखते हुए किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए मृतक हम नेता के घरों के आसपास और गांव में जगह-जगह पुलिस की तैनाती देखी गई । जिसमें ए एस आई राघव कुमार सिंह, सि सुभाष चंद्र सिंह , अनिल पासवान, कौशलेंद्र कुमार सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस पदाधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अपराधी के दोस्त एवं समर्थक कहते हैं कि अगर डब्लू यादव गलत होता ,तो एनकाउंटर के बाद उसे देखने के लिए इतनी भीड़ नहीं जुटती। उसके एक खगड़िया के दोस्त ने कहा की, डब्लू यादव खुद एक न्यायिक व्यक्ति था, यहां पर सरपंच के पद पर उसकी पत्नी काविज थी। जो अपने पंचायत के लोगों का इंसाफ किया करती थी।, जिसको यूपी में पकड़ा गया और उसे वहां से लाने के वक्त रास्ते में उसे एनकाउंटर कर दिया गया, जिसका सत्यापन होना चाहिए। बताया जाता है कि जून माह में दी गई जमानत आवेदन पर सीता देवी की सुनवाई पर 7 अगस्त को फैसला होना था जिसके चलते उसको पैरोल नहीं मिली।
दो दर्जन मामले के संगीन अपराधी के मारे जाने के बाद उसके गांव के अलावा साहेबपुर कमाल थाना के सीमा , खगड़िया और मुंगेर में भी उनके समर्थकों में सन्नाटा फसरा हुआ है।
जबकि ग्रामीणों के मुताबिक रंगदारी मांगना डब्लू यादव के लिए साधारण बात थी,वह अपने 25 साल के अपराधिक जीवन में तो उसने दो दर्जन लोगों की हत्या की होगी, लेकिन डर से लोग उसे नामजद भी नहीं कर पाते थे। फिलहाल हत्या समेत अलग-अलग संगीनं अपराध के लगभग 24 मामले दर्ज बताए जाते हैं। जिसमें साहेबपुर कमाल थाना में आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं के तहत 22 मामले जबकि बलिया और मुंगेर एवं अन्य मुफसिल थाना में अलग-अलग धाराओं के तहत एक-एक मामले दर्ज है।
हाय रे मां की ममता ? कहती है कि अब तूऊ हमारा बेटा कअ मायर देलहो ,आव त कन्यिया क छोड़ दहो ?
एक कवि ने कहा कि अब आज रोता है क्यों? जान खोता है क्यों? तेरा बेटा जुल्म ढाता रहा, और तू और तेरा परिवार मुस्कुराता रहा, आज फस गया खुद तो आहें भरता है क्यों? आखिर जिस मां की कोख को खाली किया, जिस अबला की सिंदूर मिटाई, जो बहन से राखी बधंवाने वाला भाई को छीना? उसका हाल क्या होगा। कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई भी युवा के अपराध की दुनिया में अग्रसर नहीं होता है? छोटे-मोटे अपराध करने वाले को राजनीतिक नेता वोट के लिए अपने पक्ष में लाते हैं, जिसके बलबूते वह नेताजी कहलाते हैं? क्या यह सच्चाई नहीं? पुलिस अगर किसी आरोपी को गिरफ्तार करती है,, तो नेताजी की हाजिरी थाने में जमा हो जाती है? क्या? यह सच्चाई नहीं? सर यह हमारा आदमी है, इसे छोड़ दिया जाए।




