गुरू बिंन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिले न मोक्ष, गुरू बिन लखै न सत्य को, गुरू बिन मिटै न दोष । गुरू के बिना उचित -अनुचित का ज्ञान नहीं होता, और जब तक ज्ञान नहीं हो तो मोक्ष भी नहीं मिलता।
गुरु चांद के तरह होता है, जिसके पास खुद की कोई रोशनी नहीं होती, बल्कि वह परम आत्मा से ऊर्जा और रोशनी प्राप्त करता
बरौनी/बेगूसराय/संवाददाता महंत राम जीवन दास
गुरु पूर्णिमा वह दिन है जब व्यक्ति अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, गुरु चांद की तरह होता है, जिसके पास खुद की कोई रोशनी नहीं होती बल्कि वह परम आत्मा से, ऊर्जा और रोशनी प्राप्त करता है। अन्य पूर्णिमा की रातों के विपरीत आषाढ़ महिने में चंद बादलों से घिरा होता है, जैसे गुरु अपने शिष्यों से घिरा होता है। व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाने वाला यह दिन ऋषि वेदव्यास की याद में मनाया जाता है। वे हिंदू धर्म के आदि गुरु हैं जिन्होंने वेदों को वर्गीकृत किया। 18 पुराण और महाभारत लिखे। गुरु पूर्णिमा का उत्सव सबसे पहले व्यास के शिष्यों के द्वारा किया गया था और गुरु पूर्णिमा के रूप में वह जाना जाने लगा। गुरु पूर्ण आनंद की एक सरकार घटना है। वह हमें मुक्त करता है,जिसके साथ हम गहरे प्रेम, विश्वास और श्रद्धा में होते हैं । गुरु तो एक उपस्थिति है। जिनके माध्यम से व्यक्ति को दिव्यता की पहली झलक मिलती है। एक गुरु एक साधक को बताता है और उसे एक नया जन्म देता है। ताकि वह पूर्ण विश्वास के साथ अज्ञात दरवाजा से गुजरते हुए और कई अज्ञात तले खोलते हुए अपने गुरु का अनुसरण कर सके।
,,गुरू,, शब्द का अनुवाद नहीं किया जा सकता।न तो शिक्षक शब्द में और नहीं मास्टर शब्द में वह सौंदर्य है। व्हाट्सएप में गुरु की घटना इतनी गहन भारतीय की है,कि किसी भी देश की कोई भी भाषा इसका अनुवाद करने में सक्षम नहीं है। गुरु शब्द दो शब्दों-गु, और रु से बना है। गु का अर्थ है-अंधकार,रु, का अर्थ है-वह जो इसे दूर करता है।
गुरु का शाब्दिक अर्थ है**प्रकाश**। और आपके अंदर का प्रकाश है। हां! यदि आप किसी बुढ़िया जिस या कृष्णा या महावीर से मिलते हैं। यह आपके लिए अपने आंतरिक गुरु को खोजने में बहुत मददगार होगा। क्योंकि बुद्ध को देखकर, अचानक आपके अंदर एक बड़ा उत्साह, और आशा पैदा होगी। गुरु सड़क को वास्तविकता की एक झलक देता है शिक्षा नहीं, बल्कि जागृति देता है। गुरु शिक्षक नहीं,शगुरु जागृत करने वाला है। इसके साथ ही गुरु के प्रति और करिश्माई नेता के प्रति जो आकर्षण होता है उसमें बहुत बड़ा अंतर होता है।
वह जिसमें गुरुत्वाकर्षण होता है गुरु का अर्थ वही है।
गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिले ना मोक्ष, गुरु बिन लक्खे न सत्य को, गुरु बिन मिटै दोष। गुरु के बिना उचित अनुचित का ज्ञान नहीं होता और जब तक इसका ज्ञान नहीं हो तो मोक्ष भी नहीं मिलता इसीलिए अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने के लिए गुरु रूपी प्रकाश का मार्गदर्शन आवश्यक है।
एक शिष्य केवल अतीत है, गुरु केवल भविष्य है। और यहां इस चल उनके गहरे प्रेम और प्रतीक्षा में हुए मिलते हैं। शिष्य समय है गुरु अनंत काल है शिष्य मन है ,और गुरु अ-मन है। शिष्य वह सब है ,जो वह जानता है, और गुरु वह सब है ,जिसे जाना नहीं जा सकता। जब गुरु और शिष्य के बीच पूल बनता है, तो यह एक चमत्कार होता है, ज्ञात को अज्ञात से, और समय को अनंत काल से जोड़ना ही एक चमत्कार है। सच्चा शस्यतव गुरु के प्रेम और उनकी उपस्थिति में बिजी हो जाना है। उनके हृदय की धड़कनो के साथ एक हो जाना है। यह गुरु की कृपा प्राप्त करने के लिए खोलना है। उनकी उपस्थिति के प्रति संवेदनशी एल होना है। गुरु पूर्णिमा का एक शिष्य के लिए सच्चा आध्यात्मिक अर्थ और प्रसाद प्रासंगिकता है-यह अपने गुरु के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करने का दिन है। जो गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को होने वाली है।


