तेघरा थाना क्षेत्र का गौरा चौर अपराध कर्मियों का शरण स्थल बना।
आए दिन हो रहे घटना से उत्तरी क्षेत्र के लोगों में है दहशत।दशको पूर्व उत्तरी क्षेत्र नक्सलियों का शान काम था।
नक्सलियों के द्वारा क्षेत्र के कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था, जिस कारण लोगों में थी दहशत।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट
तेघरा थाना क्षेत्र का उत्तरी क्षेत्र , जो दशको पूर्व नक्सली क्षेत्र के नाम से चर्चित था। उक्त क्षेत्र में फिर से अपराधियों द्वारा अपराधिकं घटनाएं बढ़ने लगी है। उत्तरी तेघरा के इलाके में नक्सलियों से निजात पाए लोगों के बीच दहशत का माहौल बढ़ता ही जा रहा है। बताया जाता है कि तेघरा थाना क्षेत्र का गौरा,आलापुर,धनकौल,किरतौल,पकठौल,नोनपुर,आदि क्षेत्र जो पूर्व में नक्सलियों का गढ़ के नाम से चर्चित था,। वह फिर से उक्त क्षेत्र में अपराध कर्मियों द्वारा बेखौफ होकर विभिन्न तरह के घटनाओं को अंजाम देने में जुटे हैं। जिसको लेकर उक्त क्षेत्र के लोगों द्वारा आरक्षी अधीक्षक बेगूसराय से सघन गश्ती की व्यवस्था कराने की मांग की जा रही है। ताकि अपराध पर अंकुश लग सके। बीते दिनों अंबा निवासी अरुण मेहता के पुत्र 23 वर्षीय सत्यम कुमार उर्फ छोटू को जो अपने मोटरसाइकिल से अपने एक मित्र के शादी में जा रहा था, जिसे अपराधियों ने गौरा चौर के एक पीपल पेर के नजदीक बुरी तरह पिटाई कर कान के बाएं तरफ गोली मारकर हत्या कर दी और उसकी लाश को उसी पीपल पेड़ के बगल के गड्ढे में एक तौलिया लपेटकर फेंक दिया, और मृतक के सोने का चैन, मोबाइल एवं मोटरसाइकिल लेकर अपराधी चलते बने। इससे पूर्व भी फरवरी माह में अपराधियों द्वारा एक सीएससी संचालक पर गोलीबारी की गई थी। वहीं कुछ अपराधियों द्वारा आलापुर के एक जमींदार के जमीन पर झंडा गार कर जबरन जमीन को कब्जा करने का असफल प्रयास किया गया था। एवं उक्त जमीन में एक करता द्वारा खरीदी गई जमीन पर घर बनाने के क्रम में अपराधियों ने तोड़फोड़ और दर्जनों राउंड गोलियां चलाई थी।
बताया जाता है कि गौरा से आलापुर,किरतौल जाने वाली सड़क में चौर है, जो सुनसान रहता है। लोगों का मानना है कि इस रास्ते में दिन में भी लोगों को भय लगता है,और शाम के 6:00 के बाद तो उक्त चौर वीरान हो जाता है ,जहां अपराधियों को हर काम आसानी से करने में सहूलियत महसूस होती है। लेकिन उक्त क्षेत्र के संबंधित थाना पुलिस उक्त मार्ग में गस्ती करने में असफल दिखते हैं। जिस कारण अपराधियों को घटना को अंजाम देने में सहुलियत होती है।
जबकि उत्तरी क्षेत्र के लोगों द्वारा अपने जरूरत के कार्यों के लेकर बाजार से सामान खरीदारी करना या फिर अनुमंडल का कार्यालयओ के कार्यों को लेकर देर शाम तक उक्त मार्ग का ही उपयोग करते हैं, चुकी उत्तरी क्षेत्र के लोगों के लिए एक मात्र यही रास्ता है। जिस कारण उक्त मार्ग का उपयोग उत्तरी क्षेत्र के आमजनो के द्वारा सुबह से लेकर देर शाम तक करते हैं। लेकिन उक्त मार्ग में आय दिन हो रही घटना को लेकर जनता जनार्दन में दर समान लगा है। भय की स्थिति बना हुआ है। न जाने किस समय, किसी इंसान के साथ कब अपराधियों द्वारा अप्रिय घटना हो जाए, कहना मुश्किल है।
बुद्धिजीवियों में हो रही चर्चा को गर माने तो अपराधी और अपराध को बढ़ावा देने में कुछ हद तक स्थानीय राजनीतिक सफेद पोस्ट नेताओं का भी सहयोग माना जाता है। जो किसी घटना के बाद प्रशासन द्वारा उसे घटना में किसी की गिरफ्तारी करने पर अपनी चापलूसी पर भी करने के लिए अधिकारियों के पास पहुंच जाते हैं?




