वैदिक युग में स्त्रियों को उच्चतम स्थान प्राप्त था- ब्रह्मचारिणी मांडवी स्त्रियों को भी पुरुष के समान यज्ञ करने का अधिकार है।ब्रह्मचारिणी मांडवी ने यज्ञ को संपन्न कराया।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास ।
बेगूसराय में आर्य समाज और नारी सशक्तिकरण विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर ब्रह्मचारिणी मांडवी मुख्य प्रवक्ता के तौर पर विशेष रूप से पहुंची। कार्यक्रम का प्रारंभ देवयज्ञ के साथ किया गया, जिसके मुख्य यजमान प्रसिद्ध व्यवसाई धर्मेंद्र आर्य एवं उनकी धर्मपत्नी थे। ब्रह्मचारिणी मांडवी ने कहा कि 19वीं सदी में भारतीय समाज में नारी की दशा बहुत ही दयनीय थी। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने नारी को पुरुष के बराबर का दर्जा दिया।
स्त्री जाति के लिए उन्होंने शिक्षा के द्वार खोल दिए। उन्होंने समाज से प्रश्न किया-पुरुषों को पढ़ने का अधिकार है ,तो नारी को क्यों नहीं। स्वामी जी के निर्देशानुसार आर्य समाज ने पूरे देश में कन्या पाठशाला एवं गुरुकुल खोल दिए। आर्य समाज ने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियां बंद करवाई। विधवाओं को पुनर्विवाह का अधिकार प्रदान कर आर्य समाज ने नारी सशक्तिकरण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेकिन सदा से यह स्थिति स्त्रियों की नहीं थी ,भारतीय समाज में वैदिक काल में स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे। प्राचीन भारत में स्त्रियॉं सुशिक्षित होती थी , किन्तु वैदिक युग के बाद नारी को शनैः शनैः यज्ञ के अधिकार से वंचित किया गया और उसके ये कार्य पुरोहितों और ब्राह्मणों द्वारा होने लगे। स्त्रियों को यज्ञ के अधिकार से वंचित करने के षडयंत्र किया गया। इन सब कारणों से नारी की स्थिति हिन्दू समाज में उन्नसवीं शताब्दी के आरम्भ में अधः पतन की चरम सीमा पर पहुँच गई। जिस देश की ब्रह्मवाहिनी विदुषियों ने राजा जनक की सभा में उस समय के दिग्गज दार्शनिक पंडितों के साथ शास्त्रार्थ किया था, वहां मध्यकाल में स्त्रियों की दशा अपने पतन पर पहुँच चुकी थी। इस मौके पर जिला आर्य सभा के प्रधान श्री शिवजी आर्य, उप प्रधान मायाराम साहू, उप मंत्री धर्मेंद्र आर्य, पूर्व जिला मंत्री संतोष आर्य, शिवकुमार आर्य, डॉ सुधीर पासवान, आचार्य भूपेंद्र आर्य, आचार्य अरुण प्रकाश आर्य, सुधीर आर्य, अशोक आर्य, निभा आर्या,सहित बड़े संख्या नगरवासी उपस्थित थे।




