सिंदूर सौभाग्य का सूर्योदय है : डा सचिदानंद सिमरिया धाम में त्रीदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।
बीहट। सच आज तक न्यूज यदुनंदन कुमार।
सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ सिद्धाश्रम सिमरिया धाम के तत्वाधान में बुधवार को त्रीदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र का उद्घाटन प्रमोद कुमार झा ने अपने उद्घाटन भाषण में उद्बोधन देते हुए कहा कि सिंदूर सर्व सौभाग्य आदिकाल से प्रसिद्धि प्राप्त है। यह पूर्ण एवं वैज्ञानिकता से परिपूर्ण है । स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी रहा है। जैसे कुमकुम हमारे शरीर से नेगेटिव एनर्जी को बाहर कर पॉजिटिव एनर्जी अंदर डालता है इसलिए आज सिंदूर की सर्व व्यापकता सफल हुआ है । इस समारोह के मुख्य अतिथि डॉक्टर सच्चिदानंद पाठक अपने उद्बोधन में कहा कि सिंदूर कल अतीत है, यह सौभाग्य का सूर्योदय है, सनातन धर्म की तरफ यह भी सनातन है। भारतीय परंपरा में यह सौभाग्यवती नारी का प्रमाण पत्र भी है। समारोह के मुख्य वक्ता लोकसभा टीवी के संपादक श्याम किशोर सहाय ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिंदूर सनातन संस्कृति का गौरव भाल है । जिस सनातन को मानव सभ्यता की सबसे बड़ा जीवन वैज्ञानिक पद्धति मानते हैं सिंदूर उसका उत्कृष्ट प्रतीक है ।समारोह के सम्मानित अतिथि स्वामी गंगानन्द जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय सनातनी संस्कृति में सिंदूर शौर्य का प्रतीक है। सिंदूर शक्ति का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति का स्वरूप है इसका भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने में अमूल्य योगदान है। समझ में विषय प्रवेश करते हुए प्रोफेसर अवधेश झा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कार में सिंदूर वर्ण गणेश गणतंत्र के देवता है ।गणेश तत्व और हनुमान तत्व को जीवन में उतरने पर शुभ लाभ रिद्धि सिद्धि विघ्न विनाशक और बल पौरस्य और मंगल कामना की पूर्ति हो जाती है ।इससे पूर्व समारोह में दीप प्रज्वलित कर आगत अतिथियों के द्वारा समारोह का शुभ उद्घाटन किया गया । सर्वमंगला परिवार के द्वारा सभी आगत अतिथियों का मिथिला परंपरा के अनुसार अंग वस्त्र पाग और पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर विद्यापीठ के सचिव दिनेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किय। संस्थान के सचिव सुधीर चौधरी निदेशक डॉक्टर विजय झा सरस्वती प्रो प्रेम मीडिया प्रभारी नीलमणि वरिष्ठ सदस्य विनय कुमार झा अमरेंद्र, नीपेंद्र सिंह, सदानंद झा, रामप्रीत, राजेश, बबलू, योगीराज, अरुण मालपुरी ,राजेश झा, दिनेश झा, रमेश झा, आचार्य नारायण झा श्याम झा, राम झा, लक्ष्मण झा सिद्धाश्रम के व्यवस्थापक रविंद्र ब्रह्मचारी तरुण कुमार मनीष कुमार रजनीश कुमार सीबू झा अनुपम झा अरविंद चौधरी आदि उपस्थित थे।



