मोहर्रम इस्लाम धर्म का पहला महीना है, जिसका मुसलमानों के जीवन में विशेष महत्व है। इमाम हुसैन ने अन्याय और जुल्म के खिलाफ इस्लाम की सच्चाई इंसाफ और अजमत को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थीं ।
बरौनी/बेगूसराय/सच आज तक न्यूज संवाददाता महंथ राम जीवन की खास रिपोर्ट।
इस्लामी इतिहास के अनुसार, मोहर्रम की 10वीं तारीख को पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे (नाती) हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को यज़ीद ने करबला के मैदान में शहीद कर दिया था। इमामो के अनुसार हुसैन ने अन्याय और ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होकर इस्लाम की सच्चाई, इंसाफ और अजमत को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। मोहर्रम पर्व को लेकर बरौनी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पर्व के अनुयायियों द्वारा 6 जून को पूरी तैयारी के साथ इमाम हुसैन के अन्याय कॉल जुल्म के खिलाफ खड़े होकर इस्लाम की सच्चाई इंसाफ और अजमत को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति को याद कर पर्व मनाने को जोर-शोर से तैयारी की जा रही है। इस अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि कौन से चप्पे चप्पे पर पुलिस बल की तैयारी किए जाने की आदेश पारित किया गया है। इस अवसर पर हुसैन के अनुयायियों द्वारा ताजिया जुलूस एवं विभिन्न प्रकार की झांकियां भी निकल जाने की तैयारी की गई है। तेघरा प्रखंड अंतर्गत तेघरा, बरौनी गांव, एवं बरौनी नगर परिषद क्षेत्र के फुलवरिया, शोकहारा,बारो, बिहट नगर परिषद क्षेत्र के गढहारा, ठाकुरी चक, हाजीपुर पिपरा आदि की जगहों में पर्व को लेकर जोर-जोर से तैयारीयां चल रही है।



