शिक्षक और गुरु: एक आवश्यक अंतर गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान जागने की कला है, जबकि शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान जीवन यापन की कला।”
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट
अक्सर हम शिक्षक और गुरु को समान समझते हैं, परंतु दोनों का उद्देश्य भिन्न होता है। शिक्षक हमें ज्ञान, कौशल और सूचना देता है, जिससे हम जीविकोपार्जन कर सकें। काम, धन और पद जैसी जीवन की आवश्यकताएं शिक्षा से ही पूरी होती हैं। इसलिए संसार में शिक्षक की डिमांड अधिक है। पश्चिम ने भी शिक्षक को ही महत्व दिया है, गुरु को नहीं।
परंतु सुख और शांति केवल सुविधा से नहीं मिलती। आधुनिक शिक्षा हमें सम्मोहन से मुक्त नहीं करती, इसलिए इसे ‘अविद्या’ कहा गया है। डॉक्टर, वकील, इंजीनियर या वैज्ञानिक बनकर हम सुविधा तो जुटा सकते हैं, परंतु आत्मिक सुख और शांति नहीं पा सकते।
यहीं से गुरु की भूमिका आरंभ होती है। गुरु हमें ‘विद्या’ देता है – जागरूकता, निष्काम कर्म और आत्मज्ञान की कला। गुरु कम हैं, उनकी मांग भी कम है, परंतु भारत में गुरु को शिक्षक से ऊपर माना गया है, क्योंकि जागरूकता ही सुख और शांति की कुंजी है।
जरूरी नहीं कि विद्या पाने के लिए जंगल जाया जाए। जीवन स्वयं एक परीक्षा है, जो हमें हर क्षण जागरूक रहने को कहता है। इसलिए जीवन में शिक्षक और गुरु – दोनों की आवश्यकता है, परंतु उनके स्थान और उद्देश्य को समझना जरूरी है।


