27/6/ 25 जल दोहन के ख़िलाफ युवाओं ने निकाला पदयात्रा.
बरौनी सच आज तक न्यूज़ संवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट
बरौनी प्रखंड क्षेत्र समेत इसके आस पास के क्षेत्रों में भुगर्व में लगातार जल स्तर निचे जा रहा है. वर्तमान में कमसे कम 15 से 20 फिट निचे पानी का स्तर गिर चूका है. अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में हमें पानी नहीं मिलेगा और हमें पानी लेने ले लिए सरकारी पानी टेंकर का इंतज़ार करना पड़ेगा और हरी माँ बहने और हमलोग लाइन लगाकर पानी लेने को विवश होंगें. इसलिए समय रहते ज़िला प्रशासन और बिहार सरकार पेप्सीको को पानी की दूसरी वयवस्था करें अन्यथा हमलोग आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे. उक्त बातें शुक्रवार को ज़ीरोमाइल से निकाला गया जल दोहन के ख़िलाफ पदयात्रा में शामिल लोगों को सम्बोधित करते हुये टीम प्रियम के प्रियम रंजन ने कही. उन्होंने कहा कि उक्त यात्रा ज़ीरोमाइल से शुरू हुआ है. जो जुबली ढाबा पहुँच कर वहां से पुनः यात्रा निकाल कर ज़िला मुख्यालय तक जाएगी और इस संबंध में ज़िला पदाधिकारी को मांगों से संबंधित एक स्मार पत्र सौंपेगें. ज़ीरोमाइल स्थिति राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर के आदम कद प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद यात्रा शुरू हुई. इस मौके पर ऋषिकेश कुमार उप मुख्य पार्षद नगर परिषद बीहट, पन्ना लाल, प्रशांत कुमार समेत सैकड़ो युवा शामिल हुये. मांग पत्र के माध्यम से मांग किया गया कि पेप्सीको संयंत्र जबतक पानी का वैकल्पिक व्यवस्था न करे तब तक संयंत्र में जलाधारित कार्यों पर रोक हो. संयंत्र के 15 किलोमिटर की अवधि में स्थित जल स्रोत मृतप्राय पोखर नहर, तलाब आदि के संरक्षण की जिम्मेदारी ले कर संरक्षित करें. क्योंकि क्षेत्र कृषि आधारित है और जल संकट की वजह से कषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं तब वर्तमान स्थिति के प्रतिफल तकनीकी - गैरतकनीकी क्षेत्र में स्थानीय लोगो की रोजगार की भागीदारी 75% तक की जाय. संयंत्र के बंद होने की स्थिति में जीवन यापन के लिए निर्भर कर्मियों को जीवन यापन भत्ता प्रदान करें. संयंत्र के 15 किलोमीटर में स्थिति सार्वजनिक जगह जैसे विद्यालय, महाविधालय, सरकारी कार्यालय, खेल मैदान, पंचायत भवन में शुद्ध पेय जल की व्यवस्था अपने मद से करे. संयंत्र BIADA की खाली पड़ी जमीन पर वृक्षारोपण करें ताकि क्षेत्र के वातावरण को रहवास योग्य बनाया जा सके. भूजल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास एवं उसके प्रभाव को जनहित में साझा करें एवं उसमें कोताही की स्थिति में उचित कानूनी कारवाही हो. संयंत्र अपने मुख्य द्वार पर डिस्पले बोर्ड के माध्यम से अंग्रेजी एवं हिंदी भाषा में भूजल एवं पर्यावरण पर संयंत्र से पड़ने वाले प्रभाव को प्रदर्शित करे ताकि आम जनमानस को जागरूक किया जा सके. जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 को प्रभावी रूप से लागू किया जाय. भूल जल मॉनिटरिंग एवं संरक्षण के संबंध में शोध संस्था की स्थापना किया जाय. संयंत्र बेगूसराय से विलुप्त हो रही नदियां एवं उसके स्रोत पर लोगों को जागरूक करें समेत 17 सूत्री मांगें शामिल हैं.


