जल संकट को लेकर पेप्सी प्लांट के विरोध में सैकड़ो लोगों ने 15 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की पेप्सी प्लांट द्वारा भूजल दोहन का आरोप लगाया जा रहा है राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रतिमा पर मलयार्पणकर जीरोमाइल से पदयात्रा शुरू की गई।
क्षेत्र के करीब 50 गांव के लगभग 5 लाख की आबादी जल संकट से प्रभावित हो रही है अपनी 11 सूत्री मांग लोगों ने जिला अधिकारी को सोपा
बरौनी/बेगूसराय। सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट
पेप्सी प्लांट के खिलाफ 15KM लंबी पद यात्रा सैककरो लोगों ने की:।बेगूसराय में पानी का गलत रूप से उपयोग करने का आरोप; लगाया गया। पद यात्रियों के अनुसार क्वालिटी में गिरावट, 5 लाख की आबादी प्रभावित।
बेगूसराय के पेप्सी प्लांट पर भूजल दोहन का आरोप लगाया गया। इसका मतलब है कि जमीन के नीचे स्थित पानी का गलत उपयोग किया जा रहा है। इसके खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जल दोहन से परेशान क्षेत्र के 100 लोगों ने आज 11 अलग-अलग मांग को लेकर 15 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली।
पदयात्रा बरौनी जीरोमाइल गोलंबर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुरू की गई।जो पपरौर, देवना, हरपुर, सिंघौल, हर-हर महादेव चौक होते हुए कलेक्ट्रेट के उत्तरी द्वार पर यात्रा पहुंची।
प्रतिनिधिमंडल ने डीएम कार्यालय में मांग से संबंधित ज्ञापन दिया। पद यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्रियम रंजन, प्रशान्त कुमार और रोशन कुमार सहित अन्य लोगों ने कहा कि बेगूसराय को बिहार का औद्योगिक राजधानी का दर्जा मिला हुआ है।
भूजल की उपलब्धता में भीषण गिरावट हो रही है।
इसी कड़ी को विकसित करते हुए बरौनी स्थित असुरारी में पेप्सी प्लांट वरुण बेवरेजेज की स्थापना की गई।, जो भू-जल आधारित इकाई है। इस संयंत्र के स्थापना काल से ही क्षेत्र में भूजल की विकट स्थिति उत्पन्न हो रही है। आर्थिक दृष्टिकोण से कृषि और पशुपालन आधारित क्षेत्र में भूजल की गुणवत्ता व उपलब्धता में गिरावट हो रहा है।
जिस कारण क्षेत्र के करीब पचास गांव और पांच लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। और भविष्य की चिंताएं और बढ़ गई है। पेप्सी के अधिकारीयों से संपर्क करने के कोशिश के बाद भी सकारात्मक पहल नहीं की गई है, जो जनमानस और पर्यावरण के हित में हो। किसी भी औद्योगिक संयंत्र का मूल भाव स्थानीय सक्षम लोगों को रोजगार होता है।प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण होना चाहिए।
इससे आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण होना चाहिए। जिसमें यह पेप्सी सयंत्र अब तक नाकाम साबित हो रही है। जब जल का संकट उठ रही है, तो जान माल की सुरक्षा और उनके पालन-पोषण का चुनौती हम सब क्षेत्र के लोगों के सामने खड़ा हो रहा है। जिससे जानलेवा बीमारी का बढ़ना, संक्रमण का फैलाव व भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
जब तक पेप्सी प्लांट पानी का ऑप्शनल व्यवस्था नहीं होती है, तब तक संयंत्र में जल आधारित काम पर रोक हो। 15 किलोमीटर की परिधि में स्थित जल स्रोत मृतप्राय पोखर, नहर, तलाब आदि के संरक्षण की जिम्मेदारी लेकर संरक्षित करे। क्षेत्र कृषि आधारित है और जल संकट की वजह से कृषि का काम प्रभावित हो रहे हैं।



