पति की लंबी आयु और समृद्धि के लिए सुहागिन महिलाएं रखती है बट सावित्री व्रत ।
सावित्री पूजन को लेकर क्षेत्र के बाजारों में पूजा सामग्री से लेकर कलश खरीदारी के लिए भीर उम्र पड़ी।
यमराज द्वारा 3 वरश मांगे जाने को कहने पर सावित्री ने अपने सास ससुर की आंखें, छिन गया राज एवं 100 पुत्रों की मांग कर डाली।
यमराज ने अखंड सौभाग्यवती का वरदान दे कर अपने लोक को चले गए, तभी से वट सावित्री व्रत सुहागिनों द्वारा किया जाता है।
बरौनी/ बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज संवाददाता महंथ रामजीवन दास कि रिपोर्ट
ऐसी मान्यता रही है कि बरगद के पेड़ की आयु काफी अधिक होती है इसीलिए सुहागिन स्त्रियों के लिए बरगद के पेड़ के सदृश्य अपने पति की उम्र के लिए बरगद पेड़ की बरसों से पूजा करती आ रही है। बरौनी क्षेत्र के विभिन्न गांव एवं शहरों में भी सभी प्रकार के सुख समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिनों द्वारा सोमवार को बट सावित्री का व्रत रखा गया। जानकार ब्राह्मणों के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत सोमवार 26 मई कोई 11:00 अपराहन के बाद बट वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा एवं अर्चना महिलाओं द्वारा की गई। सोमवार को वट सावित्री पूजन को होने को लेकर ज्येष्ठ अमावस्या पर सौभाग्य दायक सोमवती अमावस्या का भी संजोग बनता है। ऐसे में पति की लंबी उम्र की कामना से जो सुहागन महिलाएं बट सावित्री का व्रत रखेंगी उनको यमराज के साथ साथ शिवजी की कृपा भी प्राप्त होगी। चंद्रमा की वृषभ राशि में संचार करने के कारण अद्भुत संयोग की वजह से उत्तम फलदाई भी है।
राजश्री अश्वपति की एकमात्र संतान सावित्री थी जिसने वनवासी राजा धूम सिंह के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में स्वीकार किया था। लेकिन नारद के द्वारा सत्यवान के हेल्प बाय आयु होने की जानकारी दिए जाने के बावजूद सावित्री सत्यवान के साथ शादी कर अपने पति सत्यवान के साथ वन में रहने की लगी।
सत्यवान महाप्रयाण के दिन लड़कियां काटने के क्रम में जब मुर्खिर्त होकर गिर पड़ा इस समय यमराज सत्यवान के प्राण को लेने को पहुंच गए। तीन दिनों तक उपवास में रहते हुए सावित्री ने यमराज से अपनी पति की प्राण को लौटा देने की याचना की। यमराज ने सावित्री के व्रत और पति प्रेम की पर प्रसन्न होकर सत्यवान के प्राण को छोड़कर तीन वरदान मांगने को कहा। लेकिन सावित्री ने चतुराई से सत्यवान के दृष्टिहीन माता-पिता के नेत्रों की ज्योति, चीन गया राज तथा अपने लिए 100 पुत्रों का प्रधान मांगा। यमराज ने सावित्री को अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देते हुए सत्यवान को छोड़कर अंतर ध्यान हो गए और तभी से सुहागिनों के द्वारा वट सावित्री का व्रत रखा जाने लगा।
सनातन धर्म में बरगद(वट) के पेड़ को काफी पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार वटवृक्ष में भगवान विष्णु समेत कई देवी देवताओं का वास होता है। जानकार ब्राह्मणों के अनुसार बट सावित्री व्रत के दिन बट वृक्ष की पूजा तथा कलवा बांधकर परिक्रमा करने से पति के जीवन में आने वाली सभी बढ़ाएं दूर होती है और लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। इसी के कारण सुहागिन औरतें बट सावित्री व्रत करती आ रही है। बट सावित्री को लेकर पूजन सामग्री कलश सहित अन्य सामानों की खरीदारी के लिए एक दिन पूर्व से ही बाजारों में भीर उम्र पड़ी थी। सुहागिनों द्वारा पूरे दिन बाजार में खरीदारी को लेकर पूजा दुकानों पर जबरदस्त भीड़ देखी गई। सुहागिनों के द्वारा सावित्री वह सत्यवान की प्रतिमा, बास का पंखा(,वियन) कच्चा सूट आदि सामग्री की सुहागिनों ने खरीदारी की। इतना ही नहीं सुहागिन महिलाओं ने नए वस्त्र भी खरीदे।






