बेगूसराय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कुमुद रंजन सिंह पर अनियमितता के आरोपों की जाँच होनी चाहिए।
पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को संबोधित है।
यह बेगूसराय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कुमुद रंजन सिंह द्वारा पारित एक आदेश की जांच का अनुरोध करता है।
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेगूसराय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3(H) 4 के तहत मौजा-सिंघील की खाता संख्या-154, खेसरा संख्या-1586, 1579 के स्वत्व निर्धारण के लिए न्यायालय में एक मामला दायर किया।
उन्होंने 3,28,17,421/- रुपये की भू-अर्जन राशि के भुगतान के लिए स्वत्व निर्धारण की मांग की। मनहर देव को विपक्षी बनाया गया, जिन्होंने ठाकुर राधाकृष्ण गोपालजी महाराज के पक्ष में 06.12.1906 के पंजीकृत अर्पणनामा के आधार पर खुद को ठाकुरबाड़ी का सेवायत बताया और पूरी राशि पर दावा किया।
वादी ने टाइटल सूट संख्या-89/23 दायर किया है, जिसमें मनहर देव और उनके भाइयों को प्रतिवादी बनाया गया है।
उन्होंने 06.12.1906 के अर्पणनामा के आधार पर गोस्वामी श्री श्याम मनोहर चेला गोस्वामी ब्रजभूषण लाल को वास्तविक सेवायत होने का दावा किया है।
वादी का कहना है कि मनहर देव और उनके भाइयों को दीवानी वाद संख्या-89/23 की जानकारी है, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए।
अदालत ने दैनिक हिंदुस्तान में 19.08.24 को उनकी उपस्थिति के लिए एक नोटिस भी प्रकाशित किया है।
अनुरोध: वादी माननीय मुख्य न्यायाधीश से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कुमुद रंजन सिंह द्वारा पारित आदेश की जांच करने का अनुरोध कर रहा है। दस्तावेज़ में संलग्न: टाइटल सूट संख्या-89/23 की वादपत्र (plaint) की छायाप्रति। यह मामला भू-अर्जन राशि के स्वत्व निर्धारण से संबंधित है। दो पक्ष हैं जो राशि पर दावा कर रहे हैं मनहर देव और गोस्वामी श्री श्याम मनोहर चेला गोस्वामी ब्रजभूषण लाल। वादी ने मनहर देव पर अदालत में पेश न होने का आरोप लगाया है। आगे की कार्रवाई माननीय मुख्य न्यायाधीश इस मामले में शामिल पक्षों और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच करेंगे। वे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को भी देखेंगे और फैसला करेंगे कि क्या कोई अनियमितता हुई है। एक कानूनी आवेदन का हिस्सा है, जो एक विवादित भूमि अधिग्रहण मामले से संबंधित है। इसमें आवेदक बेगूसराय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कुमुद रंजन सिंह के एक आदेश पर सवाल उठा रहा है।
मुख्य बिंदु
विवादित आदेश जिला न्यायाधीश श्री कुमुद रंजन सिंह ने 19.12.24 को एक आदेश पारित किया, जिसमें विपक्षी दावेदार मनहर देव को एक बड़ी राशि प्राप्त करने का आदेश दिया गया। यह आदेश भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा स्वत्व निर्धारण हेतु दायर एक विविध वाद (संख्या 6/23) के संबंध में था। आवेदक का आरोप आवेदक का आरोप है कि न्यायाधीश ने बिना कोई साक्ष्य लिए और केवल मनहर देव द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर यह आदेश पारित किया। आवेदक यह भी कहता है कि यह आदेश सरकारी अधिवक्ता के विरोध के बावजूद पारित किया गया। आवेदक का दावा है कि विवादित भूमि सिंघौल स्थित ठाकुर राधाकृष्ण गोपाल जी मंदिर की है ।और 06.02.1906 के अर्पणनामा के अनुसार, बनारस के गोपाल मंदिर के सेवायत ही इसके सेवायत हैं। रिकार्ड में विसंगतियां आवेदक का आरोप है कि भूमि के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं। उनका दावा है कि मनहर देव के परिवार ने कभी भी अर्जित जमीन का रिटर्न दाखिल नहीं किया, और यह जमीन खतियान में बकास्त के रूप में दर्ज है। आवेदक यह भी कहते हैं कि रजिस्टर-II में मनहर देव और उनके भाइयों का नाम धोखाधड़ी से दर्ज किया गया है। दाखिल खारिज विवाद आवेदक ने दाखिल खारिज वाद संख्या 1085/12-13 का भी उल्लेख किया है, जिसमें मनहर देव ने अपने नाम से लगान रसीद जारी होने का दावा किया था। हालांकि, आवेदक का कहना है कि अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड में ऐसा कोई वाद नहीं है। भ्रष्टाचार का आरोप आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि जिला न्यायाधीश महोदय ने मोटी रकम लेकर मनहर देव को भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा स्वत्व निर्धारण हेतु दायर विविध वाद में यह आदेश दिया है। न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता भूमि रिकॉर्ड में धोखाधड़ी भ्रष्टाचार के आरोप संभावित कार्रवाई उच्च न्यायालय इस मामले की जांच कर सकता है। न्यायाधीश के आदेश को रद्द किया जा सकता है। भूमि रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच हो सकती है। यह दस्तावेज़ एक जटिल कानूनी विवाद को दर्शाता है जिसमें भूमि के स्वामित्व, न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शामिल हैं। बेगूसराय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कुमुद रंजन सिंह के एक आदेश पर सवाल उठाया है।
मुख्य बिंदु
आवेदक का नाम जनार्दन सिंह
दिनांक: 19-02-2025
पता: मकरदही, उलाव, बेगूसराय
शिकायत: विविध वाद संख्या-6/23 में, न्यायाधीश ने बिना उचित साक्ष्य लिए और बिना नोटिस जारी किए आदेश पारित कर दिया, जबकि उस दिन मुकदमे की सुनवाई थी। आवेदक ने इस मामले की जांच और दोषी पर कार्रवाई की मांग की है ताकि मंदिर की सार्वजनिक संपत्ति को बचाया जा सके।यह आवेदन डाक के माध्यम से भेजा गया है, जैसा कि पोस्ट ऑफिस की रसीदों से पता चलता है। रसीदों में 19-02-2025 की तारीख दर्ज है, जो आवेदन की तारीख के अनुरूप है। एक रसीद पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को संबोधित है, जबकि दूसरी बेगूसराय सदर पोस्ट ऑफिस को। संभावित कार्रवाई उच्च न्यायालय इस आवेदन की जांच कर सकता है। न्यायाधीश के आदेश को रद्द किया जा सकता है। मामले की दोबारा सुनवाई हो सकती है। यदि न्यायाधीश दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। यह दस्तावेज़ एक महत्वपूर्ण कानूनी विवाद को दर्शाता है जिसमें न्यायिक प्रक्रिया और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के मुद्दे शामिल हैं।







