भगवानपुर क्षेत्र के औगान गांव के रहने वाले बाबा कपिल देव पंडित ने ध्रुव की कहानी सुनाई हैं।
एक दिन ध्रुव ने अपनी माँ सुनीति से पूछा कि उसके पिता उसे प्यार क्यों नहीं करते। सुनीति ने उसे बताया कि भगवान विष्णु की तपस्या करने से वह सब कुछ प्राप्त कर सकता है जो वह चाहता है। ध्रुव ने भगवान विष्णु की तपस्या करने का निश्चय किया। ध्रुव ने अपनी माँ से कहा कि वह भगवान विष्णु के दर्शन करने के लिए वन में जाएगा। उसकी माँ ने उसे समझाया कि यह बहुत कठिन तपस्या है, लेकिन ध्रुव ने अपनी बात नहीं मानी। वह वन में गया और नारद मुनि से मिला। नारद मुनि ने उसे
मंत्र का जाप करने और भगवान विष्णु की तपस्या करने का तरीका बताया।
ध्रुव ने छह महीने तक कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उसे वरदान मांगने के लिए कहा। ध्रुव ने कहा कि वह अटल पद प्राप्त करना चाहता है जो कभी नष्ट न हो। भगवान विष्णु ने उसे ध्रुव तारा बनने का वरदान दिया। ध्रुव तारा हमेशा आकाश में एक ही स्थान पर रहता है। यह ध्रुव की अटूट भक्ति और तपस्या का प्रतीक है। ध्रुव की कहानी हमें सिखाती है कि भगवान की भक्ति और सच्ची लगन से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है। यह कहानी विष्णु पुराण और भागवत पुराण में वर्णित है। यह हिंदू धर्म की एक लोकप्रिय कहानी है और बच्चों को भक्ति, धैर्य और दृढ़ संकल्प का महत्व सिखाती है। यह ज्ञान औगान के रहने वाले बाबा कपिलदेव पंडित ने सिखाये हैं। और गांव के रहने वाले जितना भी हैं श्रद्धालु सभी को यही ज्ञान देते हैं की सच्चाई की मार्ग पर चलते रहे। ध्रुव की अटूट भक्ति और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके समक्ष प्रकट हुए। ध्रुव ने छह महीने तक घोर तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने केवल वायु और जल ग्रहण किया और निरंतर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते रहे। उनकी तपस्या इतनी कठिन थी कि तीनों लोकों में हलचल मच गई। जब भगवान विष्णु ध्रुव के सामने प्रकट हुए, तो वे बालक ध्रुव के दृढ़ संकल्प और भक्ति भाव को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने ध्रुव को वरदान मांगने के लिए कहा। ध्रुव ने उनसे अटल पद मांगा, जो कभी नष्ट न हो। भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि वे ध्रुव तारा के रूप में आकाश में हमेशा अटल रहेंगे। इस प्रकार, भगवान विष्णु ध्रुव की भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें अमर पद प्रदान किया। बाबा कपिल देव पंडित के द्वारा गीता की कही हुई बात बताते हैं सभी को ध्रुव जब अपनी तपस्या करके वापस घर लौटे, तो उनके जीवन में बहुत कुछ बदल गया था। यहाँ कुछ मुख्य बातें हैं राजसी सम्मान: ध्रुव को उनके पिता, राजा उत्तानपाद ने बहुत सम्मान के साथ स्वीकार किया। उनकी माता सुनीति की प्रतिष्ठा भी बढ़ गई। ध्रुव को युवराज बनाया गया और उनके भाई उत्तम को भी उचित सम्मान मिला। धार्मिक प्रतिष्ठा: ध्रुव की तपस्या और भगवान विष्णु के आशीर्वाद ने उन्हें एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। लोग उन्हें एक महात्मा के रूप में देखने लगे और उनकी बातों को आदर से सुनने लगे। परिवार में बदलाव: ध्रुव के लौटने के बाद उनके परिवार में खुशी और समरसता का माहौल बन गया। उनकी माता और पिता के बीच संबंध सुधरे और सभी लोग प्रेम से रहने लगे। प्रजा का कल्याण: ध्रुव ने एक अच्छे शासक के रूप में अपनी प्रजा का ध्यान रखा। उन्होंने न्यायपूर्ण और धर्म-आधारित शासन किया, जिससे राज्य में सुख और समृद्धि आई। अमर पद: ध्रुव को भगवान विष्णु ने ध्रुव तारा बनने का वरदान दिया था। यह एक अमर पद है, जो आज भी आकाश में दिखाई देता है। यह ध्रुव की अटूट भक्ति और तपस्या का प्रतीक है। इस प्रकार, ध्रुव के वापस आने के बाद उनके जीवन में और उनके आसपास के संसार में कई सकारात्मक परिवर्तन हुए। उन्होंने एक उदाहरण स्थापित किया कि सच्ची भक्ति, तपस्या और धर्म के मार्ग पर चलकर मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है। जो यह ज्ञान दिए हैं बाबा कपिल देव पंडित इनका भी इच्छा है कि एक गीता लिखे सभी श्रद्धालु एवं भक्ति भाव में जो झूमते रहते हैं ज्ञान मिलते रहे





