संपत्ति के मालिकाना हक का ट्रांसफर सिर्फ रजिस्टर्ड सेल डीड से ही मान्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संपत्ति का मालिकाना हक तभी ट्रांसफर होगा जब बिक्री विलेख का पंजीकरण हो। कब्जा या भुगतान से मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता। 100 रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति का वैध विक्रय केवल पंजीकृत दस्तावेज से ही मान्य है।
सच आज तक संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति ट्रांसफर के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया
बिक्री विलेख के बिना संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होगा
1882 के ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट का हवाला दिया गया
*संपत्ति के मालिकाना हक पर सुनवाई*
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी अचल संपत्ति का मालिकाना हक तब तक ट्रांसफर नहीं होता है जब तक कि सेल डीड (बिक्री विलेख) का रजिस्ट्रेशन न हो जाए। संपत्ति का कब्जा कर लेने या सौंपने और भुगतान होने मंत्र से संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता है।
*केवल पंजीकृत दस्तावेज से होगा संपत्ति ट्रांसफर*
जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुआई वाली बेंच ने पिछले महीने दिए अपने फैसले में कहा कि 1882 के ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट की धारा 54 के प्रावधान के अनुसार, संपत्ति ट्रांसफर केवल पंजीकृत दस्तावेज से ही किया जा सकता है। 100 रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति का विक्रय वैध तभी माना जाएगा, जब यह रजिस्टर्ड दस्तावेज से किया गया हो।
*कब्ज़ा भी किसी काम का नहीं।*
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणियां एक नीलामी खरीददार के पक्ष में की है। एक अन्य ने आपत्ति उठाते हुए संपत्ति के एक हिस्से पर कब्जा होने का दावा किया था लेकिन यह दावा बिना रजिस्टर्ड 'एग्रीमेंट टू सेल' और सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी पर आधारित था। अदालत ने आपत्ति खारिज कर दी। कई बार प्रॉपर्टी डीलर या बिचौलिए के जरिए लोग पावर ऑफ अटॉर्नी और विल के जरिए संपत्ति खरीद लेते हें। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे मामलों में नजीर साबित होगा।


