भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर के स्मृति में दो दिवसीय नाट लीला का आयोजन
डिवाईन सोशल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन एवम निर्माण रंगमंच हाजीपुर के बैनर तले मातृ पितृ छाया सेवा सदन सभागार पटना में अनगढ़ हीरा, भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर को समर्पित दो दिवसीय नट लीला का आयोजन किया गया। यह आयोजन बारह वर्षों से लगातार भिखारी ठाकुर जी को समर्पित किया जा रहा है। आयोजन के पहले दिन रंगदर्शन आर्ट ग्रुप बेगूसराय के बैनर तले मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित शशिकान्त कुमार द्वारा संयोजित भिखारी ठाकुर जी द्वारा लिखित प्रसिद्ध नाटक बिदेसिया के लोक गीतों की प्रस्तुति भिखारी संगीत के नाम से प्रस्तुत की गई। भिखारी संगीत में भिखारी ठाकुर रचित प्रसिद्ध नाटक बिदेसिया के कुछ चुने हुए गीतों मंगल भवन अमंगल हारी, पिया मोर मत जा हो पुरुबवा, पिया गईलन कलकतवा ए सजनी, प्यारी देस तनी देखे द हमके, जवनिया मकनिया में हानी के केवरिया, मन हमार परदेस जाइके चाहत अबहीं प्यारी, कवने अवगुण में पियवा हमें बिसरवलन आदि गीतों की प्रस्तुति की गई। संगीत पक्ष में पुरुषोत्तम कुमार, हर्ष कुमार, प्रिंस राज, सौरभ शेखर, सागर टुडू, अमन आदर्श कोरस गायन में सहयोग कर रहे थे झाल पर अरविंद कुमार एवम ढोलक पर चंदन घोष ने संगत किया। मौके पर उपस्थित मुख्य अतिथि संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक संजय उपाध्याय ने कहा भिखारी ठाकुर जी भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे। वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। वे भोजपुरी गीतों एवं नाटकों की रचना एवं अपने सामाजिक कार्यों के लिये प्रसिद्ध हैं। वे एक महान लोक कलाकार थे जिन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर कहा जाता है। उन्होंने कहा शशिकान्त एक प्रतिभाशाली रंगकर्मी हैं, जिनमें रंग संगीत निर्देशक होने की अपार संभावना है। मौके पर उपस्थित आयोजक डॉ शैलेन्द्र कुमार पांडेय ने कहा रंगदर्शन आर्ट ग्रुप पिछले दस वर्षों से लगातार रंगमंच में सक्रिय रूप से लोक कला के संरक्षण व संवर्धन का काम कर रही है। मौके पर रंगकर्मी मदन मोहन कुमार, ज़फ़र, विजेंद्र कुमार, अभिषेक आर्य, पप्पू ठाकुर, नितेश कुमार, राजीव घोष अप्पू, नितेश कुमार, सूरज कुमार आदि उपस्थित थे, मंच संचालन डॉ शैलेन्द्र कुमार पांडेय ने किया।


