मृत्यु भोज एक समाजिक कुरीति ही नहीं बल्कि एक सामाजिक कलंक प्रथा है : सियाराम महतो
आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
इंसान स्वार्थ व खाने के लालच में कितना गिरता है उसका नमूना होती है सामाजिक कुरीतियां। ऐसी ही एक पीड़ा देने वाली कुरीति वर्षों पहले कुछ स्वार्थी लोगों ने भोले-भाले इंसानों में फैलाई गई थी वो है मृत्यु भोज के रूप में है जो मानव विकास के रास्ते में यह गंदगी कैसे पनप गई यह समझ से परे है। उक्त विचार जादूगर स्वर्गीय सियाराम महतो का है जिन्होंने तेघड़ा प्रखंड अंतर्गत धनकौल पंचायत के आलापुर ग्राम अवस्थित ग्राम कचहरी के प्रांगण में आयोजित श्रद्धा क्रम के अवसर पर पाखंड, कर्मकांड ब्राह्मणवाद आडंबर बाद व मृत्यु भोज पर कार्यक्रम के मौके पर उन्होंने व्यक्त करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि जानवर भी अपने किसी साथी के मरने पर मिलकर दुख प्रकट करते हें। लेकिन इंसानी बेईमान दिमाग की करतूतें देखो कि यहां किसी व्यक्ति के मरने पर उसके साथी, सगे-संबंधी भोज करते हें। मिठाइयां खाते हें। यह एक सामाजिक बुराई है। इसको खत्म करने के लिए हम सभी को जागरूक होकर काम करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसी घर में खुशी का मौका हो, तो समझ आता है कि मिठाई बनाकर, खिलाकर खुशी का इजहार करें, खुशी जाहिर करें। लेकिन किसी व्यक्ति के मरने पर मिठाइयां परोसी जाएं, खाई जाएं, इस शर्मनाक परम्परा को मानवता की किस श्रेणी में रखें। इंसान की गिरावट को मापने का पैमाना कहां खोजे, इस भोज के भी अलग-अलग तरीके हें। उन्होंने बताया कि समाज में ऐसा कहा जाता है कि मृतक के आत्मा के शांति के लिए ये सब किया जाता है। ये कहाँ लिखा हुआ है समझ में नहीं आता। हम अपने पितरों को जीते जी ही अच्छे से खिलायें-पिलायें, उनकी सेवा करें तो ये अधिक उचित होगा। इस कुप्रथा
के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं मिलता है। प्राचीन समय में ये प्रथा राजा के लिए होती थी। राजा की मृत्यु के पश्चात बारहवें दिन पगड़ी बांधने की रस्म होती थी जिसका अभिप्राय ये होता था कि मृतक के बाद अब ये उत्तराधिकारी होंगे। लेकिन अब तो यह एक कुप्रथा बन चुकी है। छोटे-बड़े सबके मृत्यु के पश्चात ये रस्म अनिवार्य बना दी गयी है। हम व्यक्तिगत रूप से तो इन कुप्रथाओं का विरोध करते हें लेकिन सामाजिक स्तर पर जब अपने ऊपर बात आती है तो पीछे हट जाते हें। उन्होंने कहा कि इन कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। लोगों को जागरूक होना होगा, ये खुद को समझाना होगा, शुरुआत अपने से ही करनी होगी। मौके पर स्मृति राम ज्योति देवी के तेल चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके पति कमल पासवान, पुत्र मंटुन पासवान रेलवे कुर्मी एवं पुत्र रामलाल पासवान सहित उपस्थित सैकड़ो लोगों ने एक स्वर में मृत्यु भोज का बहिष्कार करने का संकल्प लिया। मौके पर प्रखंड प्रमुख नरेश पासवान, उपभोक्ता संरक्षण समिति के प्रदेश अध्यक्ष संजीव कुमार भारती, डॉ रामाधार पासवान, पूर्व सरपंच शिवजी कुमार दास, पूर्व सैनिक सुरेंद्र दास, उप सरपंच बृजनंदन साह, जन वितरण विक्रेता संतोष कुमार, कबीर मठ के अध्यक्ष विश्वनाथ साहब सहित सैकड़ो लोग कार्यक्रम में शामिल हुए


