रेलवे इम्प्लाइज यूनियन प्रथम,मेंस कांग्रेस दूसरे व कर्मचारी यूनियन तीसरे स्थान पर।
आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
-पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर जोन में रेलवे यूनियन की मान्यता को लेकर 12 दिसम्बर को मतगणना हुई।इस मतगणना में दो सत्र से जीते कर्मकारी यूनियन तीसरे स्थान पर आ गया।वहीं ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन ने सबसे ज्यादा 21265 वोट लाकर मान्यता के हकदार बने। उनकी बंपर जीत हुई। वही
दूसरे स्थान पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे मेंस कांग्रेस रही, जो 20549 वोट हासिल किया। तीसरे स्थान पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन रही जो 17630 वोट पर सिमट गई और उन्हें बुरी तरह से हर का मुंह देखना पड़ा। पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर कार्यालय से सहायक कार्मिक अधिकारी प्रभात कुमार ने
पत्र जारी कर बताया कि 4 से 6 दिसंबर के दौरान गुप्त मतदान आयोजित हुआ था।
पूर्व मध्य रेल हाजीपुर जोन अंतर्गत पाँच मंडलों में कुल मतदाता 78228 थे।जिसमें
कुल वैध मत 62288 पाए गए। इस ट्रेड यूनियन को कुल 21265 मत प्राप्त हुआ।यह मान्यता इस पत्र के जारी होने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेगी।
यह महाप्रबंधक के अनुमोदन से जारी किया जाता है।
इधर ईसीआर में मान्यता प्राप्त चुनाव में ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन की विजय होने से कर्मचारियों में खुशीयों की लहर है।नेताओं ने बताया कि इस चुनाव में रेलवे कर्मचारी ट्रैकमेंटेंर एसोसिएशन और एलारसा का समर्थन प्राप्त था।
इनके माध्यम से जीत सम्भव हो पाया है। लोग पूर्व मध्य रेलवे में तीसरा विकल्प चुने हें ।
एलारसा के जोनल वर्किंग प्रेसिडेंट संजय कुमार सिंह,रेल नेता संदीप कुमार,अजय कुमार गुप्ता आदि ने कहा कि नयी सरकार पुराना पेंशन हमारा अधिकार है। उन्होंने
कहा कि यह जीत आपके संघर्ष, एकजुटता और अधिकारों के प्रति आपके विश्वास का परिणाम है। इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि, जब कर्मचारी अपने हक़ के लिए संगठित होकर खड़े होते हें तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। विशेष रूप से उन मुद्दों की जीत पर गर्व महसूस करती है, जिनके लिए यह संघर्ष किया गया।जैसे पुरानी पेंशन योजना ओपीएस की पुनर्बहाली पेंशन नहीं तो वोट नहीं,निजीकरण और निगमकरण का विरोध,
रेल में भ्रष्टाचार रोकने की मुहिम,ग्रेड पे 4200 की बहाली,एलडीसीई प्रक्रिया में पारदर्शिता,कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जीवन रक्षक यंत्र समेत कई अन्य कर्मचारी हितकारी मुद्दे शामिल थे।
यह जीत केवल ईसीआरईयू
की नहीं, बल्कि हर रेलकर्मी और कर्मचारी संगठन के विश्वास की जीत है।












