नहाय-खाय के साथ आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ शुरू
तेघड़ा से आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
तेघड़ा/बेगूसराय
शक्ति के साक्षात पूजन अर्चन व दर्शन का चार दिवसीय महापर्व छठ मंगलवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो गया।नहाय-खाय के साथ आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ शुरू हो गया। बुधवार को खरना और गुरुवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। शुक्रवार को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही लोक आस्था के इस महान पर्व का समापन हो जाएगा। मंगलवार को व्रतियों ने गंगा घाटों पर स्नान कर व्रत का संकल्प लिया। वहीं कद्दू भात का भोजन किया। वहीं बुधवार को होने वाले खरना की तैयारी शुरू कर दी। व्रतियों द्वारा पूजन सामग्री की निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। इधर, छठ को लेकर तेघड़ा नगरीय एवं गांव तक के बाजार सज गए है। बाजारों में सूप, नारियल, पात, घी, फल आदि की जमकर बिक्री शुरू हो गई है। मंगलवार को अनुमंडलीय बाजार , फुलवरिया बाजार,तेघड़ा, बिढ़नियां बाजार , पकठौल चौक, चिल्हाय घाट के अलावे ग्रामीण इलाके में दुकानें सजी रही। उधर, छठ-घाटों की तैयारीभी शुरू हो गई है।
पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियंवद को कोई संतान नहीं थी तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ।
प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई है, इसी कारण वो षष्ठी कहलाती है। उन्होंने राजा को उनकी पूजा करने और दूसरों को पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा। राजा प्रियंवद ने पुत्र इच्छा के कारण देवी षष्ठी की व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से छठ पूजा होती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब राम-सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया। पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया। मुग्दल ऋषि ने मां सीता पर गंगा जल छिड़क कर पवित्र किया था। जिसे सीता जी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।





