गरीब , असहाय को सहयोग दिलाना ही राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन का उद्देश्य:- अभिमन्यु सिंह (जिलाध्यक्ष)
बेगूसराय:- जिला अन्तर्गत सदर प्रखंड के पावर हाउस रोड स्थित सामुदायिक भवन (सार्वजनिक बंगला) के प्रांगण में राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के कार्यकारिणी सदस्यों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता संगठन के बेगूसराय जिलाध्यक्ष व अधिवक्ता एवं पत्रकार अभिमन्यु सिंह ने किया। वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभिमन्यु सिंह ने कहा कि आज हम यहां एक महान और आवश्यक संघर्ष की चर्चा के लिए इकट्ठे हुए हैं । यह संघर्ष एक देश जाति धर्म या वर्ग का नहीं है बल्कि पूरे मानव समाज का है, यह संघर्ष है मानवाधिकारों का वह अधिकार जो हर इंसान के लिए जन्मसिद्ध है, जो उसे बिना किसी शर्त या भेदभाव के मिलना चाहिए हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां मानवाधिकार की बात करना कभी-कभी कठिनाइयों का सामना करना होता है । बेगूसराय जिलें के कई प्रखंडों में आज भी लोग अत्याचार शोषण भेदभाव और समानता का शिकार हो रहे हैं । ऐसे समय में मानवाधिकार संगठन की भूमिका केवल महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि अनिवार्य हो जाती है लेकिन यह लड़ाई केवल उन अत्याचारियों से नहीं है जो बाहर से बैठ कर कर रहें हैं।बल्कि यह लड़ाई उसे चुप्पी से भी है, जो इन अनुयायियों को बढ़ावा देती है जब हम किसी के अधिकारों के हनन पर चुप रहतें हैं तो हम भी उस अन्याय का हिस्सा बन जाते हैं । यही कारण है कि एकमात्र संगठन राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की आवाज एक उम्मीद बन कर उभरती है। उन लोगों के लिए जो अपने अधिकारों के लिए लड़ नहीं सकतें , उन लोगों के लिए जिनकी आवाज को दबा दिया जाता है , मानवाधिकार कोई उपकार नहीं है यह किसी की कृपा से मिले अधिकार नहीं है, यह हर इंसान की गरिमा का अनिवार्य हिस्सा है । फिर चाहे वह शिक्षा का अधिकार हो, स्वास्थ्य का अधिकार हो, पुलिसिया जुर्म का हो,बाल श्रम का हो, जाती, धर्म, लिंग या भाषा के आधार पर भेदभाव से मुक्त रहने का अधिकार हो, यह सभी अधिकार हर एक व्यक्ति के लिए समान है हमारा संगठन इस विश्वास पर टिका है कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब तक संभव नहीं है जब तक उसके सबसे कमजोर, सबसे सूचित लोगों को, न्याय, सुरक्षा, और समानता, नहीं मिलती। आज का यह समय हमें यह याद दिलाने का भी है जब तक दुनिया के किसी भी कोने में एक भी व्यक्ति अपने अधिकारों से वंचित है तब तक हमारा काम अधूरा है हमें न केवल अपने आसपास के लोगों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए खड़ा होना होगा । हमें न केवल अत्याचारों के खिलाफ लड़ना होगा बल्कि उसकी मानसिकता को भी बदलना होगा जो वह सामान्यता को जन्म देती है, मित्रों मानवाधिकार संगठन की ताकत उनके सिद्धांतों, और कार्यकर्ताओं में निहित है। यह लड़ाई लंबी है और इसे लड़ने के लिए हमें एकजुट होना पड़ेगा हमें अपनी आवाज को उसे स्तर तक पहुंचना है जहां अत्याचार और अन्याय का अंत हो सके । हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हर व्यक्ति को उसका अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाता आज मैं आप सभी से निवेदन करता हूं आप इस आंदोलन का हिस्सा बने और अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी उठाएं याद रखें जब तक हम सब एक साथ खड़े नहीं होंगे, तब तक देश, राज्य और जिला में बदलाव नहीं आएगा लेकिन जब तक हम एक साथ खड़े होंगे तो दुनिया में बदलने मानव का संवैधानिक अधिकार कोई छिन नहीं सकता है। वहीं मंच का संचालन जिला उपाध्यक्ष बालेश्वर महतो ने किए। मुख्य अतिथि संगठन के प्रदेश संरक्षक डॉ राजकुमार आजाद ने संबोधित करते हुए कहा कि आज-कल हमारे माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय अपराधियों और आतंकवादियों के लिए रात के बारह बजें भी खुलता है, वहीं माननीय न्यायालय अगर गरीब बेसहारा के लिए अगर रात के बारह बजें खुलने लगे तभी हम असल रूप से मानवाधिकार का प्रचार प्रसार को सफल मानेंगे। मुख्य वक्ता समस्तीपुर जिला के निवासी और संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ कैलाश महतों ने कहा कि सम्पूर्ण बिहार में मानव का अधिकार प्राप्त करवाना ही संगठन का मूल उद्देश्य है। आगे संबोधित करते हुए प्रमंडल अध्यक्ष आरक्षी निरीक्षक राधेश्याम रजक ने कहा कि राष्ट्र सेवा के बाद मानव का सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इस धर्म में सभी की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वहीं बैठक को संबोधित करते विशिष्ट अतिथि और प्रदेश के पदाधिकारी डॉ अरुण कुमार पासवान ने कहा कि अपराध, भ्रष्टाचार से बिहार को मुक्त कराना प्रथम प्राथमिकता रहेगी। जिला उपाध्यक्ष रामविलास महतों ने कहा कि जिलें में अपराध की घटना में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि देखी जा रही है कुछ दिनों पहले ही खबर मिली कि एक 80 वर्ष बुजुर्ग महिला के साथ मनचलों ने गलत हरकत करनें से पीछे नहीं रहते हैं और इस मामले में जो भी दोषी है उसकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। नगर परिषद् बीहट के नगर मंत्री विपिन राय ने कहा कि जिलें में देखा जा रहा है कि अपराधियों और पुलिस का गठजोड़ चल रहा है जिसका जीता-जागता उदाहरण भी देखनें मिलता है जहां गरीबों को एक एफआईआर दर्ज कराने के लिए लगातार थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं वहीं एक अपराधी वर्षों से चकिया थाना का गाड़ी चलाता है। इतना अवश्य हुआ कि वरीय पदाधिकारी के सहयोग से उस अपराधी को सलाखों के पीछे अवश्य भेजा गया, मगर उस प्राईवेट ड्राईवर को बचाने की पूरी कोशिश किया जिसका उदाहरण दर्ज एफआईआर से देखा जा सकता है। जब तक मानव का अधिकार का हनन होगा तब-तब मानवाधिकार संगठन मानव को अधिकार दिलाने के लिए हमेशा संघर्ष करतें दिखेंगे। इस बैठक में कंचन पासवान, राजकुमार, सिकंदर , राजेन्द्र पासवान सहित अनेक वक्ताओं ने अपना-अपना बातें रखें।


