पूर्व विधायक और मुखिया पर ताबड़तोड़ फायरिंग, बाल-बाल बची बाप-बेटे की जान
तेघड़ा /बेगूसराय केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह और उनके प्रतिनिधि के धमकी मामले का अभी 24 घंटे भी नहीं हुई कि भाजपा के पूर्व विधायक ललन कुंवर सहित उनके पुत्र सह पिढ़ौली पंचायत के मुखिया कुंवर अनुराग प्रताप पर बदमाशों ने शनिवार की सुबह ताबड़तोड़ फायरिंग कर जान लेने की कोशिश की। हमले में किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। उक्त घटना तेघड़ा थाना अंतर्गत पिढ़ौली पंचायत के काली स्थान की है पूर्व विधायक के बेटे मुखिया कुंवर अनुराग प्रताप ने बताया कि शनिवार की सुबह एक अनजान नंबर से उनके मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले शख्स ने उनके साथ गाली गलौज की। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो अपराधी ने जान से मारने की धमकी दी। गाली गलौज करने के दौरान पता चला कि वह गांव का ही शराब माफिया है ।तो वह घर से निकल कर उसके घर पर जाकर उसकी मां से इस बात की शिकायत करने लगे तभी उक्त शख्स ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। मुखिया के साथ उनके पिता पूर्व विधायक ललन कुंवर भी मौजूद थे। किसी तरह बॉडीगार्ड के सूझबूझ से मुखिया और पूर्व विधायक की जान बच सकी। अपराधी का कहना था कि पूर्व विधायक ने शराब के मामले में उसे जेल भिजवाया था लेकिन अब वह जेल से बाहर आ गया है और दोनों बाप-बेटा को इसका अंजाम भुगतना होगा। मौके पर तेघड़ा थाने के पुलिस और डीएसपी डॉक्टर रविंद्र मोहन प्रसाद ने मामले की जांच शुरू कर दी है। डीएसपी डॉक्टर रविंद्र मोहन प्रसाद ने बताया कि आज सुबह पूर्व विधायक और उनके पुत्र पर फायरिंग की बात सामने आई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही पूरे मामले का उद्वेदन कर लिया जाएगा। बता दें कि ललन कुंवर 2010 से 2015 तक तेघड़ा विधानसभा की विधायक रह चुके हें। उनके पुत्र कुंवर अनुराग प्रताप वर्तमान में मुखिया हें। उक्त घटना को लेकर बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश व्याप्त है। इस घटना को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कारी आलोचना की है।मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष अमलेश कुमार राय ने घटना की निंदा करते हुए कहा है कि बिहार में शराब माफियाओं का बोल वाला बनता जा रहा है। सरकार शराबबंदी मामले में पूरी तरह फेल हो चुकी है। अंकुश लगाने को लेकर अब लगातार जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया जा रहा है। घटना में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी तुरंत हो और मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए ।और वैसे शराब माफिया पर नकेल कसने के लिए विशेष पुलिस दस्ता तैयार करें। नहीं तो आने वाले समय में जनप्रतिनिधि चरणबद्ध आंदोलन करने को विवश होंगे


