तेघड़ा के ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले की अंतिम चरण में चल रही तैयारी।
तेघड़ा से आर एम न्यूज़ संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
तेघड़ा / बेगूसराय
बेगूसराय जिले के तेघड़ा के ऐतिहासिक व्यापार नगरी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अलग ही धूम रहती है। मेले को ऐतिहासिक रूप देने को लेकर तेघड़ा परिक्षेत्र में भव्य तैयारी अंतिम चरण में चल रही है। कुल 15 मेला मंडप के अतिरिक्त बरौनी फ्लैग काली स्थान स्थान एवं सरस्वती नगर बरौनी एक युवा संघ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला समितिका मेला मंडप पंडाल निर्माण के लिए पटना ,कोलकाता, लखनऊ ,चेन्नई आगरा ,आदि के पंडाल निर्माता एवं कारीगर दिन-रात अंतिम रूप देने में लगे हें । आलम यह है की गगनचुंबी पंडालों में बीटिंग के काम के बाद और फिर रंग-बिरंगे कपड़े एवं अन्य सजावटी सामानों से सजाने का काम चल रहा है। दूसरी तरफ मंसूरचक ,कोलकाता ,दुर्गापुर ,आगरा की मूर्ति कलाकारों द्वारा भगवान श्री कृष्ण की झांकियां को तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इन मूर्तिकारों द्वारा भगवान की झांकियां को तैयार किया जा रहा है। वही लगभग 10 किलोमीटर के मेला परिक्षेत्र में पूरे सड़कों को बांस बल्लों एवं लाइटिंग से सजाने की तैयारी चल रही है। मेले के दौरान मनोरंजन के लिए कई ग्राउंड में बड़े और ऊंचे झूले लगाए जा रहे हें। जिसमें तेघड़ा गौशाला परिसर प्रखंड मुख्यालय परिसर मैदान, कांग्रेस भवन के पीछे स्थित ग्राउंड में झूले लगाए जा रहे हें। मेले में श्रद्धालुओं के नाश्ते आदि के लिए फुटकर दुकान लगाए जा रहे हें।
बताते चलें कि तेघड़ा में 1928 ई से भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु मेला देखने आते हें। यहां आकर्षण का केंद्र आकाशी झूला ,मौत का कुआं, जादूगर, ड्रैगन ,ट्रेन मीना बाजार आदि सज रहा है। यह मेला मथुरा वृंदावन के बाद का तेघड़ा में बड़े स्तर का श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला का आयोजन होता है। यहां ऐतिहासिक श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला ना सिर्फ देश का दूसरा सबसे बड़ा मेला है बल्कि यह धर्मनिरपेक्षता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है। पांच दिवसीय इस मेले में धर्म और जाति का कोई मायने नहीं रह जाता है। इस बार फिर भारत के दूसरा मथुरा और वृंदावन बन चुके तेघड़ा की हर गली कृष्ण मय हो गया है ।वही संपूर्ण मेला समिति के संयोजक अरुण कुमार साहू ने मेले में सुरक्षा की दृष्टिकोण से एसटीएफ और बीएमपी की तैनाती की मांग की। क्योंकि मेले के दौरान असामाजिक तत्वों के साथ चेन स्नेचिंग गैंग सक्रिय रहते हें। इसके लिए प्रशासन को विशेष व्यवस्था करना होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि 2023 के जन्माष्टमी मेला में अनुमंडलीय एवं प्रखंड प्रशासन की सजगता और दक्षता की वजह से पांच दिवसीय मेला को ऐतिहासिक रूप दिया गया था। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस बार भी संपूर्ण मेला समिति, बुद्धिजीवियों एवं प्रशासनिक सजगता एवं सक्रियता तथा बेहतर कोऑर्डिनेशन के आधार पर पांच दिवसीय मेला की विधिवत संपन्नता हेतु तेघड़ा वासियों का सहयोग अपेक्षित है ।







