मानदेय निर्धारित हो ,सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले ,सुरक्षा पर सरकार ध्यान दें: आशा कार्यकर्ता
तेघड़ा , बेगूसराय
देशभर में चल रहे आशा कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। ये अपनी मांगों को लेकर हमेशा से रोष जताती आयी है। पर हर बार सरकार ने इन्हें अनदेखा किया है। ये आशाएं हर आपदा में स्वास्थ्य विभाग के लिए अहम कड़ी रही है। महामारी से लड़ती इस गुमनाम करोना वॉरियर्स को अब तक ना तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिला है और ना ही निर्धारित मानदेय जिंससे आशा कार्यकर्ताओं को अपनी मांगों के लिए एक बार फिर धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सोमवार को अनुमंडलीय अस्पताल के द्वार पर बिहार प्रदेश आशा कार्यकर्ता संघ के बैनर तले अपने विभिन्न मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना का आयोजन सुनीता कुमारी की अध्यक्षता में की गई। आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि पिछले कई मानऋ।
ह पहले लंबे हड़ताल को लेकर सभी आशा कर्मी काम करना बंद कर दिया था जिससे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का खस्ता हाल हो गया था। फिर मामूली मानदेय वृद्धि की घोषणा के बाद सभी आशा कम पर लौटी थी। आशा कर्मियों ने बताया कि हमारा काम 24 घंटे का है। गांव में जब किसी को जरूरत पड़ती है दिन हो या रात तुरंत भागना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग को कोई भी रिपोर्ट चाहिए तो सबसे पहले आशा को ही याद किया जाता है। आशा कार्यकर्ताएं ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण रीढ़ है ।फिर भी हमें परमानेंट नहीं किया जा रहा है हम जो काम कर रहे हें उसका समय पर पैसा भी नहीं मिल रहा है। सरकार पर आरोप लगाते हुए आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और निर्धारित मानदेय को गंभीरता से नहीं ले रहा है। सरकार हमेशा इन आशा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा में असफल रही है। चाहे उनके मानदेय की बात हो या फिर काम करने के घंटे की या फिर सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने की,इसे हमेशा अनदेखा किया गया है। मौके पर दर्जनों आशा शामिल हुए


