मानवाधिकार दिवस पर परिचर्चा आयोजित।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानव समाज पर ढाए गए जुल्म, सितम और उसके बाद असमानता, हिंसा, भेदभाव को देखते हुए अधिकारों की जरूरत को समझकर संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल मानव अधिकार ड्राफ्ट किया, जो 10 दिसंबर को घोषित किया गया।जिसके पहले ही अनुच्छेद में कहा गया है कि हर व्यक्ति को जन्म से ही स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्राप्त है। उक्त बातें उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गौरा में यूथ और यूको क्लब द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर परिचर्चा संवाद के के दौरान मुख्य वक्ता सह सदस्य स्टेंडिंग कमिटी भारत सरकार अमरेंद्र कुमार अमर ने कही। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान की जिंदगी, आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार है मानवाधिकार है. भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले को अदालत सजा देती है।आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक और राजनीतिक के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हें। जैसे बाल मजदूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकार. शामिल है। कर्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार सहनी ने किया एवं आगत अतिथियों को अंग वस्त्र से सम्मानित किया । मुख्य अतिथि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी श्री राम उदय महतो ने कहा की मानव समुदाय के लिए राष्ट्रीयता, लिंग, रंग, धर्म, भाषा और किसी भी आधार पर बिना भेदभाव किए बुनियादी अधिकार सुनिश्चित किए गए। संचालन यूथ इक्को क्लब के नोडल शिक्षक अविनाश शास्त्री ने करते हुए कहा कि सभी मानव-जाति के मूलभूत अधिकारों की व्याख्या करते हुए हस्ताक्षर किए थे. 1993 में NHRC अर्थात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अस्तित्व में आया । परिचर्चा संवाद यूथ क्लब की राखी कुमारी,ज्योति कुमारी,अनुष्का कुमारी,कुमुद शर्मा,राधिका कुमारी,अनुप्रिया कुमारी,अमन कुमार आदि ने भाग लिया। मौके पर शिक्षक रवि कुमार,प्रभात कुमार,धर्मवीर कुमार,शशि शेखर, वसंत कुमार, सुभाष कुमार,शिक्षिका मधु कुमारी,रूपम कुमारी ने अपना विचार व्यक्त किया।




