माता काली की वार्षिक पूजा में श्रृद्धालुओं की काफी भीड़
कई दशक से सलाना पूजा की प्रथा चली आ रही है
नावकोठी/बेगूसराय/संवाददाता
पुण्यसलिला बूढ़ी गंडक नदी के तट पर शिव स्वरूप विस्तृत वट की सौम्या छाया तथा निर्माणाधीन गगनचुंबी काली मंदिर के प्रांगण में पूर्वजों तथा मानवीय सद्गुणों के सिंधु धर्म अनुरागी स्वर्गीय मदन मोहन प्रसाद सिंह बड़े बाबू के द्वारा स्थापित वृहद पूजन उत्सव परंपरा अनुसार इस वर्ष भी मां काली की पूजा अनुष्ठान शुक्रवार को की गई।यह पूजा सैकड़ों साल पहले से आयोजित होती आ रही है। 15 ब्राह्मणों के द्वारा यह पूजन उत्सव किया गया।इस पूजा में आचार्य सुधीर झा और उप आचार्य रंजीत पाठक बनाए गए थे और इन्हीं के नेतृत्व में वार्षिक काली पूजा की गयी।काली पूजा के दौरान लगभग सवा लाख से अधिक पार्थिव महादेव की पूजा प्रतिवर्ष की जाती है जो इस वर्ष भी किया गया।पूजा के बाद सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया जाता है। खासियत यह है कि इस प्रसाद को बांध के पार यानी गांव में नहीं ले जाया जा सकता।जो भी प्रसाद बच जाता है उसे बूढ़ी गंडक नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।कालांतर में यह मंदिर वटवृक्ष के गोद में थी जो लगभग 5 एकड़ में फैली हुई थी।बाद में मंदिर का रूप दिया गया। कोषाध्यक्ष मनोज पाठक ने बताया कि इस मंदिर के निर्माण में अभी तक लगभग 60 लाख रुपया से अधिक खर्च किया गया है। इस मंदिर को देखने और पूजा करने कोलकाता सहित अन्य राज्यों से भी श्रृद्धालु पहुंचते हैं।जिन की मान्यता पूरी हो जाती है वो यहां पूजा पाठ और बलि भी चढ़ाते हैं।काली मां की ख्याति बहुत दूर-दूर तक फैली हुई है,लेकिन राज्य सरकार के नजर में अभी तक नहीं आया है।पर्यटन की दृष्टिकोण से इस मंदिर पर ध्यान देने की जरूरत है।इस अवसर पर 4:00 बजे से देर रात्रि तक जागरण का प्रोग्राम भी कराया गया।लगभग 1000 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। वहीं मुखिया संघ के महासचिव,प्रखंड अध्यक्ष व नावकोठी के मुखिया राष्ट्रपति कुमार बिड्डू ने बताया कि सदियों पुराने एक महर्षि आए थे, जिन्होंने एक छोटा सा बरगद के पेड़ की स्थापित करते हुए मां काली मूर्ति स्थापित की थी।उसके बाद वही बट वृक्ष बढ़ते- बढ़ते मां के मंदिर का रूप ग्रहण कर लिया।इस अवसर पर अध्यक्ष सनोज कुमार,कुमोद सिंह,डा० अरविंद कुमार,रामविलाश सिंह अमीन,सरोज कुमार,धीरेन्द्र कुमार, कर्मशील गौतम,अरविंद झा, महेश महतो,सुनील चौधरी,देवेंद्र दास सहित सैकड़ों कार्यकर्ता,ग्रामीण तथा दूर-दूर से आए श्रद्धालु मां काली की वार्षिक पूजा में भाग लिया।


