आदेश के प्रथम दिन 5: बजे तक विद्यालय में डटे रहे शिक्षक, कमजोर बच्चों के लिए चलाए गए अतिरिक्त कक्षाएं।
तेघड़ा ,बेगूसराय
सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधार करने के लिए शिक्षा विभाग के द्वारा लगातार प्रयास जारी है। विभागीय आदेश के अनुसार । प्रखंड में प्रारंभिक व माध्यमिक विद्यालयों के संचालक को लेकर जारी की गई गाइडलाइन 1 दिसंबर से प्रभावी रहा। इसके तहत प्रथम दिन शुक्रवार को सभी विद्यालयों का संचालन सुबह 9: बजे से शाम 5: बजे तक चला 1 दिसंबर शनिवार से ही प्रखंड में मिशन दक्ष अभियान की भी शुरुआत की गई। इसमें मिशन दक्ष के तहत पढ़ने लिखने में कमजोर बच्चों की विशेष कक्षा की व्यवस्था कराई गई जो की शाम 30: 30 बजे से 4:15 बजे तक संचालित किया गया। वही 4:15 बजे से 5: बजे तक वर्ग एक और दो को छोड़कर शेष कक्षाओं के बच्चे का होमवर्क चेक की गई। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राम उदय महतो ने बताया कि 28 नवंबर को सभी सरकारी विद्यालय के लिए टाइम टेबल घोषित किया गया है।
प्रखंड के सभी राजकीय प्रारंभिक एवं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय हेतु जारी मॉडल टाइम टेबल आज 1 दिसंबर से लागू किया गया है। 1 दिसंबर से ही मिशन दक्ष के तहत विद्यालय के कमजोर बच्चों की विशेष कक्ष भी संचालित किए गए। इसकी देखरेख के लिए प्रत्येक दिन विद्यालयों का अनुश्रवण एवं निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक शिक्षक वर्ग 3 से 8 के 5 - 5 की संख्या में चिन्हिंत बच्चों को विद्यालय की गतिविधि समाप्त होने के बाद उन बच्चों को पढ़ाएंगे। इन बच्चों की परीक्षा जिला स्तर पर अप्रैल 2024 में आयोजित होगी। यदि उस परीक्षा में यह बच्चे फेल होते हें।
तो संबंधित प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेवारी पदाधिकारी को सौंपा गया है।माध्यमिक शिक्षकों को नियमित रूप से अपने विद्यालय के पोषक क्षेत्र के दायरे में आने वाले प्राइमरी स्कूलों में एकेडमिक सपोर्ट देना है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन माध्यमिक शिक्षकों को कम से कम 6 कक्षाएं लेना अनिवार्य है। इसमें किसी प्रकार की कोताही बरतने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालय प्रधान को हिदायत दी गई है कि वह खुद के स्तर पर टाइम टेबल में कोई बदलाव नहीं करेंगे अन्यथा उनके खिलाफ विभाग करी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को पूरे दिन गतिविधि चलेगी भोजनावकाश के बाद अभिभावकों के साथ बैठक और बाल संसद का आयोजन किया जाएगा।उन्होंने बताया कि जिन स्कूलों में बच्चों की 50 फ़ीसदी से कम उपस्थिति है उन स्कूलों के प्रधान शिक्षक की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। बच्चों की कम उपस्थिति को काफी गंभीरता पूर्वक लिया जाएगा।




