दलसिंहसराय प्रखंड के बसढिया, रामनगर निवासी स्व० युगेश्वर दास जी की धर्मपत्नी श्रीमती गीता देवी का श्रद्धांजलि के अवसर पर एक दिवसीय कबीर पंथ संत सम्मेलन सह भंडारा आयोजित किया गया।
जिसकी अध्यक्षता सुखो दास ने किया तथा मंच संचालन गिरिजा दास ने किया। मुख्य अतिथि सकरा सरकार महंथ राम विलास दास ने संबोधित करते हुए कहा कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षक गुरु के साथ साथ अध्यात्मिक गुरु अवश्य बनाना चाहिए। मुख्य वक्ता डा० राजकुमार आजाद ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षित व्यक्ति एस पी , कलक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर आदि बनने के बाद माता पिता को अनाथाश्रम में पंहुचाकर मंदिर मंदिर भगवान को ढूंढता है लेकिन अध्यात्मिक व्यक्ति घोर कष्ट में रहकर भी माता-पिता में ही भगवान को खोज लेता है। विशिष्ट अतिथि श्रीमती पूनम आजाद ने अपने भजन "नदिया किनारे अमर के हो लतिया,फुले ना फले ना एगो ना बतिया,ना जाने सदगुरु देहिया के गथिया" गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्य वक्ताओं ने व्यास जी, महात्मा राजेन्द्र दास, महात्मा सहदेव दास, बालेश्वर साह, अगुआ रामदेव ठाकुर आदि संतों महंथो ने अपने प्रवचन एवं भजन से अध्यात्मिक माहौल उत्पन्न कर दिया। सव० गीता देवी के चारो सुपुत्रों यथा मानसी दास,योगी दास,सकल दास, पहाड़ी दास ने सभी अतिथियों को पुष्पों की माला पहनाकर तथा अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया तथा सभी श्रोताओं को भंडारा करवा कर सम्मानपूर्वक विदा किया।





