मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सुशासन की सरकार में ऐसे लोगों को चिन्हित क्यों नहीं किया
पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। दम तोड़ रही नल जल योजना, लापरवाही का नतीजा भुगत रहे गांव वाले, बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग।
मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक हर घर नल का जल के तहत अब इससे जुड़े गुणवत्ता पर भी कई सवाल उठने लगे हें। करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई यह योजना नल जल देख रेख के अभाव और संवेदक की लापरवाही से अब कई पंचायतों में लोगों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। सबसे बुरा हाल बरौनी दो पंचायत के घटकिन्डी दुर्गास्थान वार्ड संख्या 7 का है। जहां यह योजना पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। मामला यह है कि लगाया गया पाइप की गुणवत्ता खराब होने के कारण दर्जनों से अधिक जगहों पर पाइप लीकेज है।पाइप से पानी घरों तक पहुंचाने के बदले पानी रोड पर बहता है । हऑपरेटर सुजीत कुमार ने बताया कि पाइप लीकेज और स्टार्टर सहित कई मशीन खराब है जिसकी वजह से 8 माह से लोगों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा है । पंचायत समिति सदस्य अनुज कुमार ने बताया कि इस व्यापक समस्या को लेकर पंचायत समिति की बैठक में भी मुद्दा उठाया गया लेकिन अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। इससे भी बदतर हाल गौरा दो पंचायत अंतर्गत नया टोला दनियालपुर वार्ड संख्या 6 की है जहां वर्ष 2018 में ही योजना प्रारंभ की गई पदाधिकारियों के दबाव पर मात्र स्ट्रक्चर खड़ा किया गया। 175 घरों में से 20 से 25 घरों में ही मात्र टोटी लगा। वार्ड क्रियान्वयन समिति के खाते से 14 लाख से अधिक की राशि भी निकाल ली गई। फिर भी इस दलित और पिछड़े बाहुल्य मोहल्ले को अब तक एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। बरौनी एक पंचायत के वार्ड संख्या 14 में कई माह पूर्व पानी की टंकी धराशाई हो जाने के कारण पूरे समुदाय को पानी का संकट बना हुआ है। चिल्हाय के वार्ड संख्या 13 में एक सौ से अधिक लोगों का आधार कार्ड जमा कर लिया गया फिर भी वहां के लोग कनेक्शन के लिए टकटकी लगाए हुए हें। वहीं वार्ड संख्या 9 में महादलित परिवार के 10 एवं अल्पसंख्यक समुदाय के 10 परिवारों को स्वच्छ पेयजल अब तक नसीब नहीं हुआ है। मामला कमोबेश हर पंचायत में है कागजों पर काम पूरा हुआ लेकिन जमीन पर अधूरा अब बड़ा सवाल यह है कि जहां काम हुआ है वहां के लोगों को ही योजना का फायदा नहीं मिल रहा है तो योजना का फायदा आखिर किसे मिला । बदले में संवेदक द्वारा रोड में गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया जो दुर्घटना का आमंत्रण दे रहा है।जल घोटाले का जिम्मेदार कौन कहीं पाइप लगी है तो कहीं टोंटी नहीं, कहीं टोंटी लगी है तो पाइप नदारद, कहीं पानी की टंकी लगी है तो मोटर खराब,कहीं सब कुछ लगा है तो घटिया सामग्री योजना को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहा है। ऐसे में हैंड पाइप का दूषित पानी ही इन लोगों के लिए एकमात्र जीने का साधन बना हुआ है।इस तरह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस जल घोटाले के जिम्मेदार कौन हें। और इस सुशासन की सरकार में ऐसे लोगों को चिन्हित क्यों नहीं किया गया। बड़े पैमाने पर लोगों को विश्वास ही नहीं की भविष्य में भी ऐसे लोगों को सजा मिल पाएगी



