माता सरस्वती की अलौकिक कृपा हर तरफ उजाला कर देती है
अम्बा बाबा दुखहरण नाथ परिसर में सरस्वती पूजा का आयोजन होने से इस परिसर की सुंदरता में चार चांद लग गई।बाबा दुखहरण नाथ परिसर में यहां के स्थानीय युवाओं के सहयोग से हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान पूरा किया जाता है। माघ शुक्ल पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा की परंपरा है.मान्यता है कि इस दिन किए पूजा से ज्ञान की प्राप्ति होती है। विशेष तौर पर यह दिन देवी सरस्वती की जयंती का दिन होता है।इस दिन घर, मंदिर, पूजा पंडाल और स्कूल-कॉलेजों में वाग्वादिनी, शारदा, शतरूपा, वीणापाणि, वागेश्वरी, भारती, बुद्धिप्रदायिनी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। देवी सरस्वती को शुक्ल वर्ण, श्वेत वस्त्र धारिणी, वीणावादनतत्परा और पद्मासना भी कहा गया है. मां सरस्वती के जितने भी नाम हैं, ये सभी उन्हें अपने स्वरूप और विशेषताओं से ही प्राप्त हुए हैं. जिस प्रकार ज्ञान से ही हम सबका विकास संभव है ठीक उसी प्रकार माता सरस्वती के आशीर्वाद के बिना हम सच्चे ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकते। हम सरस्वती माता से विनती करते हैं कि वह सब पर अपनी कृपा दृष्टि हमेशा बनाए रखें। बसंत के मौसम में आयोजित सरस्वती पूजा का त्यौहार खिलखिला उठता हैं। प्रकृति के साथ-साथ मां सरस्वती की अलौकिक कृपा हर तरफ उजाला कर देती है। सूर्योदय की चारों तरफ अपने अलौकिक प्रकाश को बिखेर ही होती है जो कि मनुष्य पर परते हैं। उसके चेतना को जागृत कर देती है। इसके साथ ही मनुष्य में सकारात्मक विचार और ज्ञान से विकास होता है।




















