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गढहारा मध्य विद्यालय के प्रांगण में आयोजन की अध्यक्षता क्षेत्र के वरिष्ठ सदस्य और विकास के लिए अग्रसर अवकाश प्राप्त शिक्षक मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा ने की

 **गढ़हरा में काव्य सृजन लेखन कला कार्यशाला का हुआ आयोजन ।**


गढहारा मध्य विद्यालय के प्रांगण में आयोजन की अध्यक्षता क्षेत्र के वरिष्ठ सदस्य और विकास के लिए अग्रसर अवकाश प्राप्त शिक्षक मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा ने की।**


बरौनी/बेगूसराय/संवाददाता सच आज तक न्यूज़ महंत राम जीवन दास


काव्य सृजन लेखन कला कार्यशाला का आयोजन मध्य विद्यालय गढ़हरा परिसर में विकास के लिए अग्रसर अवकाश प्राप्त शिक्षक एवं वरिष्ठ नागरिक

मुक्तेश्वर प्रसाद वर्मा एवं गढहारा दर्पण परिवार के सदस्य इस  कार्यक्रम की अध्यक्षता की ।अतिथियों का स्वागत व सम्मान विद्यालय एचएम सिकंदर कुमार पासवान ने किया। जबकि मंच का संचालन विद्यालय की शिक्षक एवं पत्रकार रंजीत राज सिंह ने किया। समाजसेवी सुरेन्द्र कुमार,संजय कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में रुचि रखने वाले छात्र- छात्राएं शामिल हुए।इस मौके पर आमंत्रित वरिष्ठ साहित्यकार जनवादी लेखक संघ के प्रदेश सचिव कुमार विनीताभ, साहित्यकार प्रवीण प्रियदर्शी,दिनकर पुस्तकालय सिमरिया के सचिव संजीव फिरोज,नवोदित कवयित्री सुश्री प्रज्ञा वत्स आदि ने कविता लिखने- पढ़ने से जुड़ी बातों को विस्तार से बताया।साहित्यकारों ने बताया कि काव्य सृजन के लिए प्रतिभा,ज्ञान और अभ्यास की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, कवि के मन में घटनाओं के प्रति संवेदना, भावों को व्यक्त करने की क्षमता और कल्पनाशीलता ज़रूरी है,। जो उसे मूर्त रूप देने में मदद करती है।

काव्य सृजन की प्रक्रिया और आवश्यक तत्व की जानकारी रखने के लिए कई चीजों की जानकारी रखना अनिवार्य है। 

प्रतिभा कवि की मौलिक और नवीन विचारों को जन्म देने वाली सहज शक्ति  है।इसमें कवि का शास्त्र, काव्य और लोक व्यवहार का गहन ज्ञान शामिल होता है। यह निपुणता या बहुज्ञता है, जो रचना को परिष्कृत करती है। काव्य रचना की बार-बार आवृत्ति से अभ्यास आता है। जिससे कवि की रचनाएँ अधिक परिपक्व और ऊर्जस्वित होती जाती हैं। कवि के मन में उपजे भावों और विचारों को व्यक्त करने के लिए संवेदनशीलता और कल्पना का होना महत्वपूर्ण है। कवि घटनाओं से प्रभावित होकर उन्हें अपनी बुद्धि और कल्पना से एक नए रूप में ढालता है। काव्य के माध्यम से कवि अपनी आंतरिक भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करता है। यह व्यक्ति के अनुभवों, खुशी और दुख को व्यक्त करने का एक ज़रिया है। काव्य में शब्दों का चयन, छंद, और अलंकार प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अलंकारों के सही प्रयोग से काव्य को और अधिक प्रभावशाली और सौंदर्यपूर्ण बनाया जाता है। कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं को सुनाकर उसके भावों को भी व्यक्त किया।इस मौके पर उर्दू मध्य विद्यालय बरौनी के प्रधानाध्यापक चंद्र कुमार,अंकिता मिश्रा,सुधीर वर्मा,मो खालिद सैफुल्लाह,कुमारी सुमित्रा,उषा कुमारी,संगीता कुमारी,अनन्या,गायत्री,अर्चना,साक्षी,आयुष,राजकुमार,चक्रेश भारद्वाज समेत बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं शामिल हुए।







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