गढहारा-1-2 पंचायत के छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए समाज सेवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष द्वारा 96 घंटे का अन्न त्याग सत्याग्रह प्रारंभ।
जिसकी सूचना पूर्व से स्थानीय पदाधिकारी सहित चुनाव आयोग एवं प्रधानमंत्री तक दी गई है।
96 घंटे का अन्न त्याग के उपरांत शरीर त्याग तक अनशन जारी रहेगी।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के प्रारंभिक पाठशाला मध्य विद्यालय बारो को प्लस टू का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर समाज सेवा संघर्ष समिति के बैनर तले यह आंदोलन प्रारंभ की गई है।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास।
जिसने समाज सेवा का द्रढ निश्चय कर लिया हो,तो कोई ऐसा कार्य नहीं जो पूरा नहीं किया जा सके। अवकाश प्राप्त एक ऐसा शिक्षक जिसने क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के लिए मध्य विद्यालय को प्लस टू का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों से लेकर चुनाव अधिकारी एवं प्रधानमंत्री तक को त्राहिमाम संदेश भेजकर बिहार विधानसभा चुनाव से 5 दिन पूर्व यानि एक नवंबर शनिवार के 10:00 बजे दिन से स्कूल के गेट के सामने 96 घंटे का अन्न त्याग, एवं उसके उपरांत शरीर त्याग तक अनशन जारी रखने की घोषणा कर दी थी। जिसको लेकर आज एक नवंबर को 10:00 बजे दिन से उक्त अवकाश प्राप्त बुजुर्ग शिक्षक ने 96 घंटे का अन्न त्याग सत्याग्रह प्रारंभ कर दिया है।गढहारा के दोनों पंचायतों में छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक भी हाई स्कूल या प्लस टू स्कूल नहीं है। जबकि 150 वर्षों से यह स्कूल यहां स्थापित है और इसमें 31 कमरे भी है, मैदान सहित सभी संसाधनों से पूर्ण विद्यालय को प्लस टू करने की मांग संघर्ष समिति द्वारा लगभग 5 वर्षों से की जा रही है। जबकि इस प्रसंग पर शिक्षा विभाग उदासीन निविया अपना आए हुए हैं। अध्यक्ष श्री वर्मा के अनुसार 5 साल से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन के साथ-साथ पत्राचार भी जारी रखी गई है। लेकिन उसके बाद भी शिक्षा विभाग के द्वारा तथ्यहीन वह तर्कहीन संवाद प्रस्तुत कर स्थानीय लोगों को आंदोलन होने पर मजबूर करते रहे हैं। जबकि प्रतिवर्ष स्थानीय दोनों पंचायत के सैकड़ो छात्रों को दूसरे प्रखंड में नामांकन के लिए दूर जाने की विवस्था बनी हुई है। अध्यक्ष श्री वर्मा ने दृढ़ निश्चय के साथ कहा कि चाहे जान रहे या जाए सरकार को मांग तो मांगनी ही पड़ेगी। क्योंकि दोनों पंचायत के छात्रों का भविष्य अंधकार मैं दिख रहा है। इस प्रसंग में समाज से भी सुरेंद्र कुमार के अनुसार यह विद्यालय स्थापना के 150 वर्ष पूरा कर चुके हैं। इसी विद्यालय से राष्ट्रकवि दिनकर की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त हुई थी। लेकिन शिक्षा विभाग 31 कमरों से नियुक्त मैदान समेत सभी संसाधनों से पूर्ण इस विद्यालय को प्लस टू करने की मांग को अनदेखा करता रहा है। लेकिन अब तो जब तक न्याय नहीं मिलेगी तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। इसको लेकर चाहे जितनी भी कठिनाइयां सामने आएगी उसे झेला जाएगा। हिम्मत करे इंसान तो क्या हो नहीं सकता । कर्म किए जा फल की इच्छा मत करें इंसान, सच्चाई की राह में जीत होगी ही।


