छठ महापर्व का शुरुआत नहाय-खाय से हो गई। सनातन धर्मालंबी छठ महापर्व को लेकर सूर्य की उपासना के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ जुट गए हैं।
छात्र व्रतियों द्वारा 36 घंटे का उपवास रखकर अपना परिवार और बाल बच्चों की दीर्घायु होने की कामना करके कठिन तपस्या करती है।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास की रिपोर्ट
सर्च महापर्व की शुरुआत सनातन धर्मावलंबीयो माता -बहनों द्वाराआज शनिवार से नहाय-खाय के साथ लोक आस्था और सूर्य उपासना के पवित्र पर्व छठ की शुभ शुरुआत हो गई है। दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या समय हस्ताचल गामी सूर्य, भास्कर, को अर्घ । वो तीसरे दिन अहले सुबह उदयाचल गामी सूर्य को अर्घ देकर पर्व को संपन्न किया जायगा।जो सनातन धर्मावलंबीयों के लिए न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्वच्छता, अनुशासन, संयम और पर्यावरण संरक्षण का भी अनोखा संदेश भी देता है। छठ महामहापर्व बिहार, पूर्वांचल और पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाता है। जिसका शुभारंभ हो चुका है। जिसके लिए स्थानीय पोखरों, गंगा घाटों की साफ सफाई एवं सजावट एवं छठ व्रतियों सुरक्षा की व्यवस्था का काम युवा श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही है। जो अंतिम चरण में है।चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रती शुद्ध आहार और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं। इसके बाद खरना, सांझ अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न होता है। छठी मैया और भगवान भास्कर से संतान सुख, आरोग्य, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की जाती है।
यह पर्व समाज में एकता, समानता और सामूहिक भावना का प्रतीक है। छठ घाटों पर हजारों श्रद्धालु मिलकर भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति और मनुष्य के बीच संतुलन बनाए रखना ही सच्ची पूजा है।
छठी मैया की कृपा से आपके जीवन में आनंद, आरोग्य और आत्मिक शांति बनी रहे।
आपके घर-आँगन में सदा सुख, समृद्धि और उजाला बना रहे।
जय छठी मैया! 🙏🌅
🪔 “सूर्य देव की आराधना से जीवन में आए नई ऊर्जा और उत्साह,
छठी मैया करें हर मनोकामना पूर्ण — यही शुभकामना है आज और सदा रहे।” 🌼


