कार्तिक कल्पवास महोत्सव के शुभ अवसर पर सर्व मंगला सिद्धाश्रम परिसर में महर्षि चिदात्मन वेद विज्ञान अनुसंधान न्यास के तत्वावधान में महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह
का आयोजन स्वामी चिदात्मन जी महाराज के परम सानिध्य,डॉ सचिदानंद पाठक की अध्यक्षता तथा संचालक द्वय डॉ घनश्याम झा और स्वामी सत्यानंद जी के द्वारा किया गया समारोह का शुभारंभ पंडित कन्हैया झा पंडित दिगंबर झा रमेश झा राजेश झा लक्ष्मण झा दिनेश झा रजनीश झा हंस झा के संयुक्त स्वर से हुआ स्वागत गान सुश्री मीनाक्षी और नंदनी कुमारी के द्वारा किया गया समारोह में विषय प्रवेश करते हुए न्यास के उप निदेशक प्रो अबधेश झा ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने ही सर्वप्रथम विखंडित भारत को अखंडित कर सभी दुख ताप रहित रामराज स्थापित किया किया समारोह के सम्मानित अतिथि स्वामी प्रेम तीर्थ जी महाराज ने कहा कि डाकू रत्नाकर राम राम जपकर डाकू से महर्षि वाल्मीकि बन गए सम्मानित अतिथि पंडित धनंजय श्रोत्रिय ने कहा कि आदि कवि महर्षि वाल्मीकि अपने तप बल से साक्षात ब्रह्म के समान हो गए समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ धनाकर ठाकुर ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि एक विलक्षण प्रतिभा से लक्षित व्यक्ति थे संपूर्ण जब संपूर्ण आर्य ब्राह्मणवादी व्यवस्था में व्यस्त है नारीऔर दलित उतपिरित इस समय हो रहे थे उस समय डाकू रत्नाकर समाज में महर्षि वाल्मीकि के रूप में प्रतिष्ठित होकर समाज को एक नई दिशा दी समारोह के अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद पाठक ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन यह संदेश देता है कि शिव संकल्प से और दृढ़ इच्छा शक्ति से मानव देवत्व की प्राप्ति कर सकता है इस अवसर पर संस्थान के सभी सदस्य तथा न्यास के निदेशक डॉ विजय झा सचिव सुधीर चौधरी उप सचिव प्रो प्रेम मीडिया प्रभारी नीलमणि,नवीन प्रसाद सिंह,दिनेश सिंह,राजीव कुमार,विजय कुमार सिंह,निपेंद्र सिंह,अरविंद चौधरी,सुशील चौधरी,सदानंद झा,रंजना कुमारी,विंदु झा,श्याम ,राम,लक्ष्मण,ऋषिकेश झा।


