गंगा मईया के जयकारे के साथ कल्पवास मेला का ध्वजारोहण
बीहट बेगूसराय
सिमरिया गंगा तट पर 41 दिनों तक चलने वाले राजकीय कल्पवास मेला में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक कल्पवास करने वाले साधु-संत व श्रद्धालुओं ने अपने-अपने खालसा शिविर में मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण किया। इस दौरान श्रद्धालु हरे राम हरे कृष्ण, धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो व हर हर गंगे के जयकारे लगा रहे थे। खालसा शिविर में ध्वजारोहण के साथ ही साधु-संत व श्रद्धालु कल्पवास के नियम में जुट गए हैं। आश्रम परमेश्वर कृपा संत सेवा शिविर खालसा में महंत कृष्णा दास व विनोद कुमार ने बताया कि उनके खालसा शिविर में सामूहिक रूप से ध्वजारोहण व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस दौरान खालसा जनसेवा समिति के अध्यक्ष तन तुलसी विष्णुदेवाचार्य, मौनी बाबा, - गोविंद जीव सेवा शिविर के महंत डॉ. राघवाचार्य, अयोध्या के महंत रामसेवक दास शास्त्री, लक्ष्मी नारायण खालसा के महंत हरिकांत शास्त्री, महंत राजाराम दास, रामेश्वर दास, जेपी सेनानी महंत कृष्णा दास, रामदेव दास, श्याम दास, महंत राधा मोहन दास उर्फ हीरा जी, नंदजी दास, शिव चंद्र दास समेत अन्य साधु-संत मौजूद थे। वहीं, सहरसा से कल्पवास के लिए सिमरिया पहुंचे मौनी बाबाराजकीय कल्पवास मेला ध्वजारोहण करते महंत विष्णुदेवाचार्य, मौनी बाबा, श्याम दास, हीरा दास, हरिकांत शास्त्री समेत अन्य साधु-संत।
सेवा शिविर खालसा के महंत दिनेश दास ने बताया कि आज से उनलोगों का कल्पवास का नियम शुरू हो गया है। कल्पवास के दौरान वे लोग भगवान की पूजा-अर्चना व भजन कीर्तन में लीन रहेंगे। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के वृंदावन से पहुंचे महंत लाडली दास ने बताया कि आश्विन पूर्णिमा के दिन मंगलवार
पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
पूर्णिमा के मौके पर मंगलवार को गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने हर हर गंगे की जयकारे के साथ गंगा में डुबकी लगाने के बाद पूजा-अर्चना भी की। इसके बाद सिमरिया गंगा तट पर स्थित विभिन्न मंदिरों व आश्रमों में पहुंच भगवान की पूजा-अर्चना तथा संत-महात्माओं से आशीर्वाद लेकर दान-पुण्य किए।
को ध्वजारोहण के पूर्व वे सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ गंगा स्नान के बाद गंगाजल भर परिक्रमा करते हुए खालसा शिविर पहुंच उत्सवी माहौल में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया। महंत लाडली दास ने बताया कि उनके खालसा में पूर्णिमा से पूर्णिमा तथा संक्रांति


