करवा चौथ की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है ,यह व्रत सबसे पहले देवी सावित्री ने की थी जो की एक पतिव्रता नारी थी।
सत्यवान की मृत्यु के बाद सावित्री ने यमराज से अपने पति की जिंदगी वापस मांगी थी, यमराज ने सावित्री को वरदान दिया था की वह अपने पति की जिंदगी वापस लेकर अपने घर जाएंगी, इसके लिए उसे एक वर्ष तक निर्जला व्रत करवा चौथ का सर्वप्रथम व्रत करना होगा।
पहले पतिव्रता सावित्री ने करवा चौथ का व्रत रखी, जिसके लिए ,सबसे पहले उन्होंने एक मिट्टी का बर्तन लाई ,चावल और गेहूं उक्त बर्तन में डालकर कलश स्थापित किया।
बरौनी बेगूसराय संवाददाता महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट
महत्वपूर्ण पात्र है घुमावती देवी और यमुना जी सावित्री को पानी पिला के यमुना जी जो यमराज की बहन है, जबकि सावित्री ने अपने पति की जिंदगी वापस पाने के लिए करवा चौथ का व्रत किया था,।धूमावती देवी ने सावित्री को करवा चौथ व्रत रखने का सलाह दी थी, उन्होंने सावित्री को बताया था कि यह व्रत रखोगी तो तुम्हारे पति की जिंदगी वापस आ जाएगी। जब सावित्री के 1 साल का तप करके उसंके पति की जिंदगी वापस आ गए तो, उन्होंने यमुना जी केआदेशा नुसार व्रत के निर्मल जल को अपने हाथों से सावित्री को जल पिलाकर व्रत को तुरवाया। व्रत की सामग्री चावल, गेहूं, आटा, हल्दी ,कुमकुम, फुल, दीप, धूप ,प्रसाद, मिठाई देवी गौरी माता, शिवजी, गणेश, चंद्र देव,की की पूजा अर्चना की थी,।






