(स्वच्छ बरौनी) पर गहरा सवाल, दीपावली के दिन 80 वनर्षीय पूर्व पत्रकार एवं विद्वान एक्टिविस्ट को उठानी पड़ी झाड़ू।
**सूचना अधिकार के तहत गलत का विरोध करने पर नगर परिषद के द्वारा जनरलिस्ट को झाड़ू उठाने पर मजबूर किया**
**बरौनी नगर परिषद के सफाई कर्मी के द्वारा दबंग के घरों में भी प्रतिदिन साफ सफाई की जाती है।**
**बरौनी/बेगूसराय/संवाददाता महंत रामजीवन दास की रिपोर्ट
घोर कलयुग बीत रहा है, आज भी दबंगों की ही चलती है, ज्ञानी पुरुष, विद्वान, जनप्रतिनिधि एवं पत्रकार भी दबंगों के आगे पीछे चलती है। फिर समाज सेवक पत्रकार, आरटीआई एक्टिविस्ट एवं शरीफों को कौन पूछता है, क्योंकि ऐसे लोग सामने सामने ही सच्चाई उगल देते हैं। कानूनी प्रक्रिया में भी सूचना की मांग कर देते हैं। जिनके लिए उन्हें सजा भुगत नहीं पड़ती है। जिसका नमूना नगर परिषद बरौनी में देखने को मिला। दीपावली के शुभ अवसर पर साफ-सफाई की व्यवस्था पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब 20 अक्टूबर 2025,को ठीक दीपावली के पावन पर्व के दिन, स्थानीय 80 वर्षीय पूर्व वरिष्ठ पत्रकार, अधिवक्ता-सह-आर०टी०आई० एक्टिविस्ट, गिरीश प्रसाद गुप्ता को अपने घर के आगे लगी गंदगी को साफ करने के लिए स्वयं हाथों में झाड़ू थामनी पड़ी।. हिंदुओं के महत्वपूर्ण त्योहार और खुशी के इस दिन, जब हर घर में साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है, तब नगर परिषद के संबंधित कर्मियों द्वारा राजेंद्र रोड स्थित श्री कृष्ण गुप्ता के घर के सामने की सफाई, झाड़ू लगाना पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया ।. यह घटना नगर परिषद की कार्यशैली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है कि क्या? यह महज भूल थी, या फिर वरिष्ठ नागरिक को जानबूझकर परेशान करने का कृत्य. 'स्वच्छ बरौनी, सुंदर बरौनी' के दावों के विपरीत, इस आधे-अधूरे कार्य से आहत श्री गुप्ता ने अर्ध-नग्न होकर विरोध स्वरूप स्वयं हाथों में झाड़ू लेकर सफाई का कार्य किया।, जो नगर परिषद की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है.। उनका कहना है कि इस कार्य में उन्हें कोई शर्म नहीं है, क्योंकि नगर परिषद के गठन से पूर्व भी सभी लोग यह जिम्मेदारी निभाते थे।, लेकिन आज सार्वजनिक (करों) से प्राप्त धन को हड़पकर केवल साफ-सफाई की खानापूर्ति करना ही मुख्य कार्यशैली बन गई है.वो भी दबंगो के घर के सामने प्रतिदिन अहले शुवह सफाई कर्मी को देखी जा सकती है । उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग क्षेत्र के हर जगह कचरे का अंबार, अपशिष्ट का जमावड़ा और गंदगी फैली हुई है, जिससे पर्यावरण दूषित हो रहा है ,और आम लोग परेशान हैं।, लेकिन नगर परिषद वालों को इसकी कोई शर्म नहीं है।. एक वर्ष में एक बार आने वाले दीपावली जैसे पर्व पर भी इस तरह की लापरवाही बरतना अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जो नगर परिषद के कर्मचारियों की कार्य निष्ठा और जनता के प्रति उनके दायित्व पर एक करारा प्रहार है।. पूर्व पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा उठाया गया यह कदम बरौनी में लचर साफ-सफाई व्यवस्था का जीवंत प्रमाण है कि उनके द्वारा परिषद के योजनाओं के कार्य में हस्तक्षेप कर सूचना की मांग की थी। कहीं इसके विरोध में जो परिषद के लोगों द्वारा सफाई कर्मी को उनके आगे की गंदगी को साफ करने से मना कर लिया था। इस घटना पर स्थानीय बुद्धिजीवियों एवं कई पत्रकारों ने यह मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर तुरंत संज्ञान लें? और 'स्वच्छ भारत अभियान' की मूल भावना का सम्मान करें.? नहीं तो क्षेत्र के बुद्धिजीवी इस पर चिंतन करते हुए आगे की नीतिगत कार्यवाही के लिए मजबूर होगी।


