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Sach Aaj Tak News वेदों के अनुसार आओ निराकार विशकर्मा ईश्वर, जिसने सृष्टि की रचना की उसे याद करें।

वेदों के अनुसार आओ निराकार विशकर्मा ईश्वर, जिसने सृष्टि की रचना की उसे याद करें।


**सकल जगत का निर्माण करने वाले सबसे वैज्ञानिक और अभियंता ईश्वर का एक नाम,,विश्वकर्मा,, है,, उसने सारा जगत बनाया,, हमने उसे बनाया।** 


** हिन्दूओ के देवी देवताओं के चित्र किसी चित्रकार की कल्पना मात्र है, जिसका वास्तविकता से कोई सम्बंध नही है।क्योंकि इनको किसी ने प्रत्यक्ष देखा नहीं।**


**बरौनी/बेगूसराय/संवाददाता आज तक न्यूज़ महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट

बंधुओं! मूर्तियों या चित्रों को परमपिता परमेश्वर मत समझ लेना, क्योंकि परमपिता परमेश्वर का कभी जन्म नहीं होता और उस प्रभु की मानव आकृति नहीं होती।ये जो आप कलाकृति भगवान नुमा देवी देवताओं में देख रहे हैं ये सबका चित्रकार द्वारा काल्पनिक चित्रण किया गया है। इस कलाकृति में चार हाथ भी दिखाएं गए है 4 पाव नहीं, इसका क्या मतलब है? जब चार हाथ होते हैं तो चार पैर भी होने चाहिए ,सर भी दो चार होना चाहिए? क्या कभी आपने संपूर्ण संसार में वर्तमान में 7:30  अरब व्यक्तियों में ऐसा कोई व्यक्ति देखा अथवा सुना जिसके चार हाथ हो? आपका उत्तर होगा नहीं है, तो बंधु जैसा वर्तमान में नहीं है ,तो ऐसा कभी भी विज्ञान के विरुद्ध नहीं होता, यही सत्य है।

चित्रकार के द्वारा मूर्तियों के हाथो में हथियार देना, शेर पर बैठाना, शस्त्र को महामणडित करना है। ऋषि विशकर्मा के चार हाथ दिखाने का मतलब उनको चारों वेदों की ज्ञान शक्ति से परिपूर्ण कर्मशील दर्शाने का प्रयास है, यह अलंकारिक वर्णन है ,जैसा कहा जाता है कि चांद सा मुखड़ा ,जबकि चांद और मुखड़े का आपस में कोई लेना देना नहीं। समझदार व्यक्ति समझ जाते हैं कि किसी मुंह की सुंदरता सौम्यता के लिए चांद से तुलना की जा रही है। मूर्ख नहीं समझ सकते।

अतः हम अपनी बुद्धि का सदुपयोग करें ,और मूर्तियों  तथा परमपिता परमेश्वर के भेद को ठीक-से जानने का अध्ययन करना चाहिए। 

 और सामान्य मनुष्य की तरह एक, चारों वेदों के ज्ञाता महापुरुष थे जिन्हें ऋषि कहा जाता है। ऋषि नाम वैज्ञानिक का है, जो शोध करते हैं वे ऋषि कहलाते थे।

हम अपने महापुरुषों की जयंती पुण्य तिथियां इसीलिए मनाते हैं, कि उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर सकें, तथा उनके जीवन अनुकूल अपने जीवन को बना सकें। ऐसा करते हैं तभी उनकी जय-जयकार होगी और हमें भी लाभ होगा, अन्यथा मूर्खता में जीने से कोई लाभ नहीं, ना स्वयं का ना संसार का। 

इस लिए वेदो में वर्णित निराकार विश्वकर्मा ईशवर की उपासना करें,जो विज्ञान तर्क और सत्य पर अधारित है। 

आओ लौटें वेदो की ओर ----

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