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Sach Aaj Tak News मां गंगा के क्रोध के सामने बेबस हो रहे हैं दियारा क्षेत्र के किसान एवं आमजन। मां गंगा के रूद्र रूप से दियारा क्षेत्र के फसल लगी हुई भीगी के बीघे धरती। इस परिस्थिति में सिर्फ आश्वासन देते हैं संबंधित पदाधिकारी-किसान।

 मां गंगा के क्रोध के सामने बेबस हो रहे हैं दियारा क्षेत्र के किसान एवं आमजन। 

मां गंगा के रूद्र रूप से दियारा क्षेत्र के फसल लगी हुई भीगी के बीघे धरती। 

इस परिस्थिति में सिर्फ आश्वासन देते हैं संबंधित पदाधिकारी-किसान।

दियारा क्षेत्र के मधुरापुर ब़लडर घाट , बरौनी मधुरापुर पंचायत के वार्ड संख्या 10 से 14 तक एवं मथुरापुर पुवारी सीढ़ी घाट और जयनगर अमरपुर में गंगा के गर्भ में बीघे के बीघे फसल लगी हुई धरती गंगा में विलीन हो रहे हैं।


बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास। 

तेघरा प्रखंड एवं बरौनी प्रखंड क्षेत्र के दियारा में मां गंगा रुद्र रूप में दिख रही है। मां गंगे के जलस्तर में हो रही वृद्धि से क्षेत्र के किसानों की फसल लगी हुई धरती कटाव के कारण गंगा में विलीन हो रही है। जिस कारण क्षेत्र के किसानों में हाहाकार मची हुई है।तेघरा प्रखंड के मधुरापुर दक्षिण टोल बोल्डर घाट मे हो रही कटाव के कारण फसल लगी बीघे के बीघे धरती गंगा में विलीन हो रही है, वहीं रिंग बांध पर भी खतरा में मडरा  रहा है, वही हाल बिचला टोल का भी बताया जा रहा है। जबकि बरौनी मधुरापुर पंचायत के वार्ड संख्या 10 से 14 तक, गंगा के रूद्र रूप से ग्रामीण एवं किसानों में हा हा कर मचा हुआ है। फसल लगी धरती कई बीघे गंगा में विलीन हो चुके हैं ,जबकि इन वार्डो में बनी सड़क एवं लोगों का मकान भी अब गंगा में सामने को तैयार दिख रही है। जबकि मधुरापुर पुवारी टोला सीढी घाट की दशा भी दयनीय बताई जाती है। वही अमरपुर पंचायत के जयनगर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण बीच खेत के रास्ते कटाव करते हुए बाया नदी में पानी गिरने लगा है। इन जगहों के स्थानीय लोगों के अनुसार जनप्रतिनिधि वो संबंधित अधिकारियों द्वारा पिरित लोगों की सूचना पर आते तो है, लेकिन आश्वासन देकर चले जाते हैं। लेकिन इस पर  कोई कार्यवाही होते नहीं दिख रही। मां गंगा के रूद्र रूप से किसान ही नहीं आम गरीब लोग भी परेशान नजर आ रहे हैं। जो गरीबी के मारे झोपड़ी और मिट्टी के घर में रहकर अपने बाल बच्चों का लालन-पालन करते हैं। उनका घर अगर गंगा में समा गया तो फिर वह कहां जाएंगे। क्या वह अपने बाल बच्चों के साथ खुले आकाश में रहने को मजबूर होंगे?

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