समाजवादी नेता अशर्फी राम की मृत्यु पर कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धांजलि।
बछवारा विधानसभा क्षेत्र के मंसूरचक जदयू के समाजवादी नेता अशर्फी राम का निधन पर कार्यकर्ताओं में शोक कि लहर।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास।
यह तो सच है की जिसका जन्म हुआ, उसकी मृत्यु होगी ही। और वही सत्य है।बछवारा विधानसभा क्षेत्र के मंसूर चक प्रखंड निवासी समाजवादी नेता अशर्फी राम का असामइक निधन हो गयी। उनके निधन के समाचार सुनकर जदयू कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई । वही उनकी मृत्यु की खबर सुनकर समाजवादी धारा के लोगों में शोक की लहर छा गई । वे ता उम्र नेताजी के नाम से प्रचलित the इनके मृत्यु की खबर सुनकर मंसूर चक जदयू के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष सुनील महतो, पार्टी के नेता पवन पोद्दार, जिला उपाध्यक्ष जनता दल यूनाइटेड नेता देव कुमार एवं बहुत सारे कार्यकर्ता उनके आवास पर पहुंचकर, उनके पार्थिव शरीर पर पार्टी का झंडा ओढा करऔर फूल माला चढाकर अपनी ,और अपनी पार्टी की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें भावविनी श्रद्धांजलि दी। आखिर मृत्यु भवन पर यही तो एक सत्य है की, एक दिन तो जाना होगा कालों के गाल में, मृत्यु को प्राप्त करने वाली वाले लोगों के साथ धन ,दौलत ,परिवार कोई भी साथ नहीं जाता, सिर्फ जाता है तो उनका किया हुआ कर्म।
कहा जाता है कि जिस मां ने 9 महीने अपने कोख में रखकर जिस इंसान को जन्म दिया ।वो अपने जीवन काल तक उनके याद में रोती रहती है। एवं सहोदर बहन 6 महीने महीने तक रोती है ।फिर अपने माया जाल में परकर उन्हें भुला देती है। जिन्हें लोग अर्धांगिनी कहा करते हैं । जो भेजी के सामने सात जन्मों तक जीने मरने का संकल्प लेती है। वह मृतक के 13 कम तक ही याद कर पाती है।वही परिवार में सहोदर भाई तो पूर्वजों की संपत्ति में मृतक भाई के हिस्से की जमीन को हथियाना में जुट जाते है। जिन्हें लोग अर्धांगिनी कहते हैं,जो शादी के समय वेदी के सामने सात जन्मों तक साथ रहने का संकल्प लेती है और मंगलसूत्र धारण करती है ।वह भी तो मात्र 13 दिनों के कर्म तक ही याद कर पाती है, फिर मायाजाल में फंस जाती है। ना साथ धण ,, सिर्फ मृतक के किए गए अच्छे कर्म को ही लोग याद रख पाते हैं? यही सच्चाई है। मानवी संसार का।


