मिथिला में आदि कुंभ को पुनर्स्थापित कर भारत का मान बढ़ाया: स्वामी चिदात्मन जी। गोविंद हरे गोपाल हरे उद्घोष के साथ गूंज उठा सिमरिया धाम।
बीहट। सच आज तक न्यूज़ संवाददाता यदुनंदन।
सर्वमंगला सिद्धाश्रम सिमरिया धाम स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने सैकड़ों श्रदालुओं एवं भक्तों साथ मंगलवार को तीर्थस्थली सिमरिया धाम में गोविंद हरे गोपाल हरे उद्घोष के साथ भ्रमण करते हुए राम जानकी गंगा घाट पहुंचे जहां उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व एवं सिद्धिदात्री माता के पूजन के महत्व की चर्चा की।
इस पुनीत अवसर पर स्वामी चिदात्मन महाराज ने कहा कि जहां से भौतिक अनुसंधान का अंत होता है, वहां से आध्यात्मिक अन्वेषण शुरू हो जाते है। यह अनुसंधान जगत के कल्याण के लिये तो ही हो रहा है। मिथिला में अनादि काल से मंथन हो रहा है। जहां जिह्वा से सरस्वती सरसती है, वही तो मिथिला है। सिमारिया धाम मिथिला का प्रवेश द्वार पर स्थित है।मिथिला ज्ञान और दान की भूमि हैं।यहां पर सौभाग्यशाली ही जन्म लेते है। मिथिला ने आदि कुंभ को पुनस्र्थापित कर विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। क्योंकि हम भारतीय देव ऋण, पितृ ऋण तथा गुरु ऋण को प्रमुखता से चुकाते है। तभी भारतीय कहलाते है। हमारे प्रधानमंत्री सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की कामना से कार्य करते है, वे आदि कुंभस्थली सिमारिया धाम को अपनी मान्यता प्रदान कर सच्चे भारतीय का कर्तव्य निभाया है। वैसे भी उनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिये समर्पित है। हम भारतीय जीवन में पूर्णता प्राप्त करने के लिये विभिन्न संस्कारों को प्रमुखता से अपनाते है, क्योंकि दानवतव से मानवत्व और मानवत्व से देवत्व तक का सफर पूरा कर पूरनतव प्राप्त करने के लिये हम वेदों पर आधारित मयार्दाओं को प्रमुखता से पालन करते है, और इसके लिये हम संस्कृत भाषा को अपना कर अपनी संस्कृति की रक्षा करते है। हम सनातनी है, विश्व में सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है, जिसका न आदि है न अंत है। हम भारतीय माता, पिता और गरू को ही अपना सर्वस्व मानते है। उनके द्वारा बताये रास्ते पर चल कर अपने जीवन की सार्थकता सिद्ध करते है। इस अवसर पर सरकार चिदात्मन जी महाराज ने सभी सर्वमंगला शिष्यों को आगामी अर्द्ध कुंभ की तैयारी पावन पर्व की तरह करने का आह्वान किया है। अतिथियों की सेवा और कुंभ पर सम्पूर्ण विश्व के कल्याण हेतु कामना की भावना रखने का आह्वान किया है। सिमारियाधाम में अनादि काल से कल्पवास की परम्परा चली आ रही है, आगे भी चलता रहेगा। इस अवसर पर व्यवस्थापक रविन्द्र ब्रह्मचारी, मीडिया प्रभारी नीलमणि रंजन, महासचिव राजकिशोर सिंह, सचिव दिनेश प्रसाद सिंह, उषा रानी, नवीन प्रसाद सिंह, सुशील चौधरी, राजा झा, तरुण सिंह, सुबोध सिंह, रत्नेश पाठक, नारायण झा, रमेश झा, दिनेश झा, राजेश झा, शंभु मिश्र, हरिनाथ मिश्र, कौशलेंद्र सिंह, रितेश कुमार, श्याम झा, राम झा, लक्षण झा सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं धर्म प्रेमी उपस्थित थे।




