मुझे नहीं पता था कि वे तिरंगा में लिपटकर आएंगे। अमरपुर ग्राम का शहीद सिमरिया में हुए पंचतत्व में विलीन। गॉड का ओनर के तहत उनका अंतिम संस्कार किया गया
शाहिद की पत्नी बोली- शहादत पर मुझे गर्व है बेटी ने कहा- पापा का सपना पूरा करूंगी जिला प्रशासन के समक्ष दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर।
बरौनी/ बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज संवाददाता महंथ राम जीवन दास की रिपोर्ट
कश्मीर के पठान कोट स्थित अपने कैंप से बेस कैंप जाने के दौरान रामबन जिले में सेना का वाहन गहरी खाई में गिर गया। इसमें शहीद हुए बेगूसराय के अमरपुर निवासी जेसीओ सुजीत कुमार के साथ दो और जवान । सुजीत का अंतिम संस्कार सिमरिया गंगा तट पर रात्रि में ही हो चुका है। उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुट गई।
बिहार सरकार के मंत्री, जिले के अधिकारी और जनप्रतिनिधि आए, सबने सांत्वना व्यक्त किया। अंतिम संस्कार के बाद अब पता नहीं कितने लोग उन्हें याद भी करेंगे या नहीं करेंगे? लेकिन बेगूसराय जिले के अमरपुर ग्राम निवासी शहीद सुजीत की विधवा सिंधु और उनके तीनों बच्चे संध्या, सोनम और किंशु के दिल पर ऐसा दर्द आ चुका है, जो शायद कभी समाप्त न हो।
पत्नी सिंधु को अपने पति की शहादत पर गर्व है, तो बच्चे भी देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले पापा पर गर्व कर रहे हैं। 3 मई की शाम से रात तक जब सुजीत की पत्नी, बच्चे और पिता से बात हुई थी, तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अगले कुछ घंटे के बाद उनके मौत की मनहूस खबर मिलेगी। अब सुजीत आएंगे तो जीवित नहीं, बल्कि तिरंगे में लिपटकर उनका पार्थिक शरीर आएंगे।एनडीए में ऑफिसर बनकर पापा के सपनों को करेंगे पूरा।
शहादत के बाद पत्नी जहां उनके अधूरे सपने को पूरा करने की कसमें खा रही है। वही बच्चे भी कहते हैं कि पापा का सपना था कि एनडीए में जाऊं और मैं एनडीए में ऑफिसर बनकर पापा के सपनों को पूरा करूंगी।पत्नी सिंधु ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह 7:33 बजे बात हुई थी। सभी का हाल-चाल पूछा था, हमने पूछा था आप ठीक तो हो, तो कहा था ठीक हूं। आतंकवादी घटना हो रही घटनाओं को लेकर आगे कुछ नहीं बताया कि कहां जा रहे हैं। लेकिन हमको लगा कि वह कहीं जा रहे हैं। हम बोले आप जहां भी रहो ,ठीक से रहो, जहां भी पहुंचिए हमको फोन कीजिएगा। बोले थे कि गंतव्य पर पहुंचते ही सबसे पहले आपको ही कॉल करूंगा। उसके बाद तो हम इंतजार में रह गए। फोन नहीं आया, खुद तिरंगे में लिपटकर आ गए।, लेकिन स शरीर चलकर नहीं,आये, आए भी तो तिरंगे में लिपट कर। मुझे बहुत-बहुत गर्व है, सुजीत बहुत ही अच्छे आदमी थे, पूरे दुनिया में वो सबसे अच्छे आदमी थे। इसलिए उनकी शहादत पर मुझे बहुत ही गर्व है,। वह मुझे शक्ति दें, मेरे साथ चलें, मेरे मन- मंदिर और दिल में हमेशा ही जिंदा रहेंगे।
शाहिद की पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांगी मदद।
प्रधानमंत्री से अनुरोध करती हूं की मेरे पति तो देश के लिए शहीद हो गए। अब उनके सिवा मेरा कौन सहारा है। इसीलिए, प्रधानमंत्री जी ही मेरी मदद करें। जब मेरे बेटे की पढ़ाई खत्म हो जाय तो उसे सिविल सर्विस चाहिए। प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री सबसे मैं अपील करती हूं कि सुजीत के अलावा मेरा कोई नहीं, तीन बच्चे हैं। अपने पति से हिम्मत लेकर मैं कह रही हूं, कि शहीद की पत्नी का रिक्वेस्ट है, कि शाहिद के बच्चों को सिविल सर्विस चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी आते हैं, सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं, अब तक कोई मदद नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी सबकी सुनते हैं, शहीद की पत्नी की तो सुन लीजिए, अब मेरा आपके सिवा कोई सहारा नहीं है।बेगूसराय से बारो अमरपुर तक कोई भी विकास का कार्य हो तो , जैसे सड़क का ही निर्माण हो तो, वह मेरे पति के नाम पर बने। जिससे वह मेरे दिल में और समाज के लोगों में तो जिंदा रहेंगे? , सब लोगों के दिल में जिंदा रहेंगे।
*बेटी को पिता पर है गर्व*।
बेटी संध्या ने बताया कि पापा से जब बात होती थी तो हमेशा आर्मी के बारे में ही बताते रहते थे। डिफेंटरी क्या होता है, कैसे ज्वाइन किया जाता है, कौन करता है, कैसे कोर डिवाइडेड है। हम दोनों के बीच हमेशा इसी की बात होती थी। मुझे एनडीए करना था और पापा इस संबंध में सारी बातें हमेशा बताते रहते थे, मुझे अपने पापा पे बहुत गर्व है। वेरी प्राउड पापा है।
अंतिम बार 3 मई को रात में करीब 10:30 बजे पापा से बाते हुई थी। उसमें भी उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ हाल-चाल पूछे थे। कहे थे कि कुछ जरूरत है तो बता दो, रात हो गई थी हमने कहा था सुबह बात करूंगी। फिर कभी बात नहीं हो सकी, मेरे पापा तिरंगे में लिपट कर घरआए। मुझे पापा का सपना पूरा करना है।
मेरे, पापा और मम्मी सबका सपना था कि मैं आर्मी अफसर बनू। मैं अभी एनडीए का प्रिपरेशन कर रही हूं और सेना में अधिकारी बनूंगी, अपने पापा के सपनों को पूरा करूंगी। लोगों में चर्चा हो रही है की जी वाहन पर अपने साथियों के साथ सवार थे
उस वाहन का नट बोल्ट ढीला होने के कारण हादसा हुआ होगा । लेकिन मेरे पापा ऐसा कभी नहीं कर सकते, मेरे पापा को गाड़ी खोलने से बनाने तक आता था। वह खुद की गाड़ी को चेक नहीं करेंगे, की गाड़ी का नट-बोल्ट ढीला है। अपना जान कौन जोखिम में डालता है।
लापरवाही से नहीं गई जान।
एक तो इतना बड़ा एक्सीडेंट हुआ, जिसमें मेरे पापा सहित उनके दो और जवान शहीद हुए। फिर कुछ लोग कह रहे हैं कि उनकी लापरवाही से हुआ है इतनी बड़ी घटना। लेकिन ऐसी बात नहीं है कि वह पहली बार जा रहे थे। ढेर सारी गाड़ियों को लेकर जाते थे, इतनी बड़ी लापरवाही नहीं कर सकते। मेरे पापा पर झूठा इल्जाम लगाया जा रहा है, प्लीज इस झूठ की चर्चा को बंद किया जाए।रिश्तेदार प्रतिभा ने कहा कि मंत्री आए थे, 2 मिनट खड़ा होकर श्रद्धांजलि दी, एवं कहा कि जहां तक होगा मदद करेंगे। लेकिन हम लोग इन सब बातों से संतुष्ट नहीं हैं। जब शहीद के परिवार की बात सही तरीके से नहीं सुन सकते हैं तो तो फिर क्या कहा जाए ।क्यों आए। 5 मिनट रुकते, पूरी बात सुनते।
पूरे देश को पता है कि सुजीत देश के लिए शहीद हुए हैं, तो ऐसे में सरकार की भी कुछ जिम्मेदारी बनती है। बिहार और केंद्र की सरकार से मांग करते हैं कि मदद किया जाए। तीनो बच्चे हैं ,उनके पढ़ाई की व्यवस्था हो, और जो भी मदद हो वो करें।
शहीद की पत्नी और माता-पिता की मदद करें। सुजीत ने शहादत दी, लेकिन अब विधवा सिंधु तीन बच्चों को लेकर कैसे जीएगी। सरकार की जिम्मेदारी बनती है की उसकी विधि समत मदद करें। लेकिन अभी तक किसी ने कोई मदद नहीं की है। हम किसी का विरोध नहीं कर रहे हैं, सिर्फ सरकार से मदद मांग रहे हैं। बहुत कठिन है, जिंदगी बहुत लंबी है, कैसे कटेगी जिंदगी, सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
जबकि चर्चा है कि शाहिद की मिलने वाली सारी सुविधाएं केंद्र सरकार क में है लेकिन बताया जाता है कि बिहार सरकार भी शाहिद के परिजन को 21 लाख रुपया देने की बात कर रही है जो चर्चा में है।





