आरक्षी अधीक्षक के जांचों उपरांत डीआईजी ने मध्य निषेध वो आर्म्स एक्ट के आरोपीत को एक बड़ीय अधिकारी के मिली भगत की शिकायत पर जांचों उपरांत थाना अध्यक्ष पर गिरि गाज।
डीआईजी आशीष भारती ने आरक्षी अधीक्षक को निर्देश देते हुए आरोपी थाना अध्यक्ष को निलंबित कर देने का आदेश दिया।
आम जनता के शिकायत पर जांच के बाद डीआईजी ने यह कार्यवाही किया है।
बेगूसराय/ बरौनी/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास की रिपोर्ट ।
किए गए कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ेगा। जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा अधिकारी। बेगूसराय के डीआईजी ने पत्रकारों को बताया कि मध्य निषेध एवं आर्म्स एक्ट से संबंधित सिंघौल थाना कांड संख्या-31/25 के एक प्राथमिक की अभियुक्त को तत्कालीन थाना अध्यक्ष अमित सिंह ने पैसे का लेनदेन कर थाना से ही छोड़ दिया था, जिसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने की थी। इतना ही नहीं इसकी सूचना संबंधित कांड के अनुसंधान करता को भी नहीं दी। ठीक तरह से कांड की जांच किए बिना अनुसंधान कराए। आरोपी पर पीआर बोड पर मुक्त कर दिया । और इसकी प्रविष्टि थाना दैनिकि या थाना के किसी अन्य अभिलेख में भी चर्चा भी नहीं किया गया।
आम जनों की सूचना पर थाना अध्यक्ष अमित कुमार सिंह के संदिग्ध आचरण, कार्य में लापरवाही और मनमाने पर लक्षित करता था । डीआईजी के अनुसार इसी के मध्ये नजर थाना अध्यक्ष को निलंबित करते हुए अनुशासनिक कार्यवाही करने का आदेश आरक्षी अधीक्षक को दिया गया है।
अधिकारी के अनुसार रजौरा पंचायत के मुखिया अहमद अंसारी के साथ किए गए गाली- गलौज, मारपीट और डॉक्टर मीरा सिंह के साथ अभद्रता करने की आरोप में थाना अध्यक्ष को बीते 28 अप्रैल को लाइन हाजिर कर दिया गया था। अब निलंबन के बाद थाना अध्यक्ष पर अन्य कार्रवाई की भी तलवार लटकी हुई है। बताया जाता है कि नीचे 26 फरवरी को सिंघौल थाना में पदस्थापित दरोगा राहुल राय के के द्वारा थाना क्षेत्र के रतौली से शराब सिंडिकेट चलाई जाने की सूचना पर छापामारी करते हुए भारी मात्रा में शराब वो देसी पिस्तौल बरामद किया गया था। पुलिस ने रतौली निवासी सुमित कुमार व प्रिंस कुमार को उनके घर से गिरफ्तार किया था वही सिंधी गेट का सरगना राजा कुमार मौके से भागने में सफल रहा था, राजा कुमार पर हथियार वो शराब मगाने का आरोप था। शिकायतकर्ता ने राजा को गिरफ्तार करने और उसे रिश्वत लेकर छोड़ देने की शिकायत की थी। जिसे जाज मे सही पाया गया। इसके साथ ही गिरफ्तार अभियुक्त व अन्य अभियुक्तों के बीच कई बार संपर्क और बातचीत की पुष्टि होने के बाद भी बिना जांच पड़ताल किए आनंन -फानन में उसे पी आर बौड पर थाना अध्यक्ष ने मुक्त कर दिया था।



