कलम को बेचने वाले पत्रकारों के लिए सीख। पत्रकारिता क्या चीज है इसे समझने की जरूरत है। कलम क्रांति।
बरौनी/ बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट ।
आपकी जय हो, हेबन्धुआत्मिक!महंथ श्री रामजीवन दास जी!
फैले आपका क्रान्तिकारी इतिहास जी!
फेसबुक पर मेरे पोस्ट का शीर्षक है-'कलमक्रान्ति'
कलमक्रान्ति का सिपहसालार वही हो सकता है,जो निर्भीक, निर्लोभी,निष्कपट और निश्छल होगा।जो कलम को प्रेमिका बना लेता है, वही सच्चा पत्रकार/साहित्यकार होता है।क्या भद्र प्रेमी अपनी प्रेमिका को बेच या गिरवी रख सकता है?कदापि नहीं।आज जो कलम को बेच चुके हैं, वो देशभक्त पत्रकार नहीं, जनता के गद्दार होते हैं।गद्दारों की गद्दारी की सजा पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलती रहती है।मैंने बेगूसराय सहित दरभंगा में भी पत्रकारिता की, लेकिन किसी के आगे घुटने नहीं टेके, इसका गवाह मेरे जीवन का इतिहास है।यही कारण है कि आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी प्रोफेसर, श्रेष्ठ हिन्दी साहित्यकार और श्रेष्ठ पत्रकार के रूप में प्रख्यात हूँ।लाखों दोहे, हजारों कविताएँ, सैकड़ों कहानियाँ और अनेक नाटक सहित प्रबंध काव्य, महाकाव्य लिख चुका हूँ, जो मुझे मरने नहीं देंगे।इतना ही नहीं।जैसे बेगूसराय में मैंने पत्रकारों को बनाया, वैसे ही दरभंगा में भी अनेक पत्रकारों सहित हिन्दी प्रोफेसर,लेखक, कवि और कहानीकार भी बनाया और अभी भी बना रहा हूँ।निःशुल्क शिक्षादान भी बरसों से कर रहा हूँ, इसलिए भी सभी सम्मान कर रहे हैं।
आप तो गवाह हैं मेरे भाई कि मैंने किसी भी अण्डरवर्ल्ड, अपराधी या सरकार से कभी समझौता नहीं किया।ऐसा कौन है-आपराधिक सरगना, जिसे मैंने झुकने पर मजबूर नहीं कर दिया।ऐसे अण्डरवर्ल्ड आपराधिक सरगनाओं में से अधिकांश मर चुके हैं और जो कुछ जीवित हैं, वो भी अपने जीवन को बदल चुके हैं।
अगर मैं भी आज के अधिकांश नये पत्रकारों की तरह बिक जाता, तब आज मैं कलमक्रान्ति का सिपहसालार बनकर कलमक्रान्ति नहीं करता।
आज जो पत्रकार परिचय पत्र दिखा कर कलम बेच रहे हैं, स्वयं को गिरवी रख रहे हैं, वे लाश के समान हैं।मेरे पास तो परिचय पत्र भी नहीं था, फिर भी खौफ खाते थे, गुनाहगार।
बेच रहे हैं जो कलम को,
वो हैं ज़िन्दा लाश।
कभी भी नहीं पाएँगे वो,
परम पवित्रोल्लास।।
सरस्वती की देन कलम है,
यह जाते जो भूल।
सिद्ध वही गोदी मीडिया हो,
बिछा रहे हैं शूल।।
जो कलम की पूजा करता,
होता वही महान।
जो कलम को बेच रहे हैं,
कहलाते शैतान।।
मैंने पहले पैदल पत्रकारिता की, फिर किसी तरह एक साइकिल ली और तब एक फटीचर स्कूटी, बाद में अच्छी स्कूटी भी ली।
जो संघर्ष करता है, ईमानदार होता है और देशभक्ति जिसके रग-रग में लहू बनकर बहती है, वह कभी बिकाऊ, लोभी, चरित्रहीन पत्रकार नहीं होता है।
पत्रकारिता एक पवित्र पेशा है।अपवित्रता के अंधकार में मर जाती है-पत्रकारिता।भ्रष्ट पत्रकारों के कारण ही आज जनता बेहाल है।
मैं तमाम नौसिखिए, होशविहीन पत्रकारों से निवेदन करता हूँ कि अपने चरित्र पर द़ाग नहीं लगावें।किसी की जी हुजूरी नहीं करें और न ही चाय-पान खा-पीकर अथवा कुछ रुपये आदि प्राप्त कर उनके पक्ष में नहीं लिखें।मेरी कलम से आपराधिक सरगना ही नहीं, जिले के बड़े-बड़े रसूख वाले भ्रष्ट नेता, मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद सहित मुखिया, सरपंच आदि भी डरते थे।
हे नवसिखुआ पत्रकार गण!मेरी भावना को समझें और बिकाऊ पत्रकार होने से बचें।अगर ऐसा नहीं करेंगे, तब माता सरस्वती के अभिशाप से आप बच नहीं सकते हैं।आप पर ही नहीं, आपके कुल-खानदान पर भी द़ाग लग सकता है।
तमाम कर्त्तव्यनिष्ठ पत्रकारों को मेरा शुभाशीष और शुभकामना।साहस, हिम्मत और मेहनत से करें पत्रकारिता।आपकी जय हो।जयकलमक्रान्ति!जयभारतजयभारती!होभारतमाँकीआरती!ऊँआत्मिकप्रेमायनमः!ऊँशान्तिःशान्तिःशान्तिःऊँ।
हे प्राणप्रिये महंथ जी!आपकी आज्ञा मिलते ही मैंने लिख दिया।इसीप्रकार विषय देकर मुझसे आप लिखवाते रहें।आपकी जय हो, हेकलमजयीअभिराम, स्वस्थरहेंअविराम।शुभानंदंअहर्निशम्, जयमाँनीलसरस्वत्यैनमः!जयमाँश्यामा!ऊँशान्तिःशान्तिःशान्तिःऊँ।



