संत पॉल पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक के बेटे दिव्यांश वत्स की असमयिक की निधन ,अचानक मौत ने सभी को झकझोर दिया,शोक में डूबा पूरा क्षेत्र
सच आज तक न्यूज़ संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
तेघड़ा /बेगूसराय
तेघड़ा संत पॉल पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक सुनील कुमार सिंह ने कभी सपनों में नहीं सोचा था कि उन्हें आज यह दिन देखने पड़ेंगे। उनके बड़े पुत्र दिव्यांश वत्स को लेकर उन्होंने कई सपने संजोए रखे थे। छोटा भाई सुधांशु वत्स एवं दोनों बहन दिव्या एवं सुप्रिया वत्स कभी सपना था कि उनका भाई दिव्यांश एक बड़ा अधिकारी बनकर देश की सेवा करेगा और अपने परिवार का नाम रोशन करेगा। लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था दिव्यांश अपने शिक्षण संस्थान संत पॉल पब्लिक स्कूल एवं सिटीकट मॉल के सामने अपने हॉस्टल अवस्थित आवास पर रविवार की रात्रि खाना खाकर अपने छोटे भाई सुधांशु वत्स के साथ बैठे हुए थे तभी अचानक हार्ट अटैक आया और वह गिर पड़े जब तक भाई और परिवार के लोग उठाया तब तक दिव्यांश इस दुनिया से अलविदा हो चुका था। डॉक्टर की टीम तुरंत पहुंचे लेकिन बचा नहीं पाए। अचानक मौत से पूरे परिवार सहित परिजनों में कोहराम मच गया वहीं अचानक हुई इस घटना से इलाके के लोग भी हैरान है। और विद्यालय परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। इस घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र के राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं अध्यात्म से जुड़े लोगों का उनके आवास पर तांता लगा हुआ था।दिव्यांश होनहार छात्र था इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड का एग्जाम दिया था। वह बेहद खुशमिजाजी और होनहार था।
विद्यालय में भी वे सभी शिक्षकों और सहपाठियों के प्रिय था।। पढ़ाई के साथ-साथ वे हर शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनके अचानक मौत से पूरे क्षेत्र के लोग स्तब्ध है। उनके परिजनों एवं सहपाठियों के आंसू नहीं रुक रहे।
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र वासियों को झकझोर कर रख दिया है। संस्थान के सचिव दादा रामबली सिंह, प्रबंध निदेशक पिता सुनील कुमार सिंह एवं प्रेसिडेंट माता लक्ष्मी कुमारी सहित पूरे परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर और शिक्षण संस्थान में खुशियों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां आज मातम पसरा हुआ है।
*अलविदा, उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें*
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। जो लोग आज हमारे साथ होते हें, वे अगले ही पल हमारे बीच न रहें - ऐसा दर्दनाक सच शायद ही कोई स्वीकार कर सके। यह त्रासदी समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि अपनों के साथ बिताया हर पल अनमोल होता है।



